राजनीति
'आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है': राहुल और खड़गे ने राम मंदिर दान में 'चोरी' के आरोपों पर पीएम मोदी को लिखा पत्र
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 06:34 pm

कांग्रेस नेताओं ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पारदर्शिता की अपील की है।
अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तीखा पत्र लिखकर राम मंदिर के चंदे में कथित 'चोरी' और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इस मुद्दे पर 'चुप्पी' को 'अस्वीकार्य' करार देते हुए कहा है कि लाखों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री को संबोधित इस संयुक्त पत्र में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज और धन के प्रबंधन में पारदर्शिता की भारी कमी है। पत्र में कहा गया है कि करोड़ों भारतीयों और दुनिया भर के हिंदुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा इस पवित्र कार्य के लिए दान किया था। अब जब वित्तीय हेरफेर की खबरें सामने आ रही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का मामला है, बल्कि उन भक्तों के साथ विश्वासघात भी है जिनकी भावनाएं इस मंदिर से जुड़ी हुई हैं।
राहुल गांधी और खड़गे ने अपने पत्र में विशिष्ट रूप से उन रिपोर्टों का उल्लेख किया है जिनमें भूमि सौदों और मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन के उपयोग में विसंगतियों का आरोप लगाया गया है। उन्होंने मांग की है कि ट्रस्ट के खातों का एक सार्वजनिक ऑडिट किया जाना चाहिए और सभी निष्कर्षों को देश के सामने रखा जाना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि जब तक एक स्वतंत्र जांच एजेंसी इस मामले की गहराई से जांच नहीं करती, तब तक जनता का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले हज़ारों भारतीय मूल के लोगों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में दान दिया था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासी न केवल भारत की सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हैं, बल्कि वे धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रबल समर्थक भी रहे हैं। चंदे में अनियमितता के इन दावों ने यहां के दानदाताओं के बीच भी चिंता पैदा कर दी है, जो चाहते हैं कि उनके द्वारा दी गई राशि का सही उपयोग हो।
पत्र के अंत में, कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ें और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्रों में भी उठाएंगे। अभी तक केंद्र सरकार या राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस पत्र ने निश्चित रूप से भारतीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक हिंदू समुदाय के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
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