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पानीपत में आम उत्सव: फलों से प्रभु का दिव्य शृंगार बना आकर्षण का केंद्र
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 09:35 am

हरियाणा के पानीपत में आयोजित आम उत्सव के दौरान मंदिर में देवी-देवताओं का आमों से भव्य शृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
हरियाणा के पानीपत जिले में हाल ही में आयोजित 'आम उत्सव' ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा। इस विशेष आयोजन का मुख्य आकर्षण मंदिर परिसर में विभिन्न प्रकार के आमों से किया गया भगवान का दिव्य शृंगार था। यह परंपरा उत्तर भारत के कृषि और आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाती है, जहाँ फसल के मौसम की पहली उपज को कृतज्ञता स्वरूप ईश्वर को अर्पित किया जाता है।
इस उत्सव के दौरान मंदिर के गर्भगृह और मुख्य हॉल को दशहरी, लंगड़ा, चौसा और सफेदा जैसे विभिन्न प्रकार के आमों से सजाया गया था। आयोजकों ने बताया कि इस शृंगार के लिए लगभग 500 किलो से अधिक आमों का उपयोग किया गया। आमों की खुशबू और उनके पीले-सुनहरे रंगों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पानीपत की गर्मी के बीच, यह 'आम उत्सव' लोगों के लिए एक सुखद अनुभव लेकर आया, जहाँ उन्होंने न केवल दर्शन किए बल्कि भारत की विविध फल संपदा को भी करीब से देखा।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो इस प्रकार के आयोजनों को 'अन्नकूट' की तर्ज पर 'फलोत्सव' माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि प्रकृति द्वारा दिए गए उपहारों को सबसे पहले भगवान को समर्पित करने से समृद्धि आती है। इस दृश्य को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। सोशल मीडिया पर भी इस भव्य शृंगार की तस्वीरें और वीडियो खूब साझा किए जा रहे हैं, जिसे प्रवासी भारतीय भी बड़े चाव से देख रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर जो हरियाणा और पंजाब क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, ऐसी खबरें पुरानी यादें ताजा कर देती हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत के आमों के मौसम को याद करते हैं। हालाँकि ऑस्ट्रेलिया में भी आमों की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन भारतीय आमों की मिठास और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराएं अनूठी हैं। इस तरह के समाचार प्रवासी भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का काम करते हैं।
उत्सव के समापन पर, इन आमों को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं और निर्धन लोगों के बीच वितरित किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक परंपरा को निभाना है, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाना और किसानों की मेहनत का सम्मान करना भी है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन की सराहना की है, जिसने शहर की सांस्कृतिक विरासत में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
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