राजनीति
यमन में हूती विद्रोहियों का भीषण हमला: बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में 18 सैनिकों की मौत, सऊदी टैंकरों को भी बनाया निशाना
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 09:37 pm

यमन में हूती विद्रोहियों के ताजा हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है। ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किए गए इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
यमन के अशांत युद्ध क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ हूती विद्रोहियों ने सरकारी सुरक्षा बलों पर एक बार फिर भीषण हमला बोला है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हूतियों द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में कम से कम 18 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई है। मरने वालों में 17 सैनिक और एक अन्य सुरक्षा अधिकारी शामिल है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और अधिक बढ़ गया है, जिससे शांति वार्ताओं के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक साथ कई ड्रोन और मिसाइलें दागीं। इस हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सुरक्षा बलों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हमले में दर्जनों अन्य जवान घायल भी हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इस सैन्य हमले के साथ-साथ हूती समूह ने समुद्र में भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल-बरदार टैंकरों (Oil Tankers) को निशाना बनाया है। हालांकि, सऊदी अरब या स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अभी तक टैंकरों को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हूतियों का कहना है कि यह कार्रवाई 'यमन की घेराबंदी' के जवाब में की गई है।
यमन का यह गृहयुद्ध पिछले कई वर्षों से जारी है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया है। यह संघर्ष केवल स्थानीय नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ईरान और सऊदी अरब के बीच की क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा भी झलकती है। ताजा हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। लाल सागर का व्यापारिक मार्ग अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए लाइफलाइन माना जाता है। इस मार्ग पर होने वाले किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और रसद आपूर्ति पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जो समुद्री व्यापार या लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े हैं, इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहे हैं। व्यापारिक मार्गों में असुरक्षा के कारण माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमलों का यह सिलसिला जारी रहा, तो क्षेत्र में एक बार फिर पूर्ण स्तर का युद्ध छिड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियां लगातार युद्धविराम की अपील कर रही हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि हूतियों द्वारा ड्रोन तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल आधुनिक युद्ध कौशल की नई चुनौतियों को पेश कर रहा है, जिससे निपटना यमन की सरकारी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
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