राजनीति
शिवलिंग पर क्यों वर्जित हैं तुलसी और हल्दी? जानिए महादेव की पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 02:01 pm

सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा के विशेष नियम हैं। जानिए क्यों शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल अर्पित करना वर्जित माना जाता है।
सनातन परंपरा में भगवान शिव को 'भोलेनाथ' कहा जाता है, जो मात्र एक लोटा जल और बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, शास्त्रों और पुराणों में महादेव की पूजा को लेकर कुछ विशेष निषेध भी बताए गए हैं। अक्सर श्रद्धालु अनजाने में शिवलिंग पर ऐसी चीजें अर्पित कर देते हैं जो धार्मिक दृष्टि से वर्जित मानी जाती हैं। मेलबर्न से लेकर सिडनी तक फैले भारतीय समुदाय में जब भी महाशिवरात्रि या सावन के सोमवार जैसे अवसर आते हैं, इन परंपराओं का पालन और इनके पीछे का तर्क समझना नई पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर तुलसी दल कभी नहीं चढ़ाया जाता। इसके पीछे 'शिवपुराण' में एक पौराणिक कथा का वर्णन है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने तुलसी के पति, असुर जालंधर का वध किया था। जालंधर की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) ने महादेव की पूजा में शामिल न होने का निर्णय लिया था। यही कारण है कि भगवान विष्णु को प्रिय होने के बावजूद तुलसी शिव पूजा में वर्जित है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हिंदू समुदाय के बीच यह जानकारी साझा करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि सांस्कृतिक विरासत का सही रूप अगली पीढ़ी तक पहुंचे।
हल्दी का प्रयोग भारतीय रसोइयों और मांगलिक कार्यों में अनिवार्य माना जाता है, लेकिन शिवलिंग पर इसे नहीं चढ़ाया जाता। शास्त्र सम्मत तर्क यह है कि हल्दी स्त्री सौंदर्य प्रसाधन का हिस्सा मानी जाती है और शिवलिंग पुरुष तत्व (वैराग्य और त्याग) का प्रतीक है। भगवान शिव को संहारक और वैरागी माना गया है, इसलिए उन पर शीतलता प्रदान करने वाली चीजें जैसे भस्म, चंदन और जल चढ़ाया जाता है, न कि गर्म प्रकृति वाली हल्दी। इसी प्रकार, केतकी के फूलों को लेकर भी एक पौराणिक आख्यान है, जिसमें झूठ का साथ देने के कारण भगवान शिव ने इस पुष्प को अपनी पूजा से निष्कासित कर दिया था।
एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य शंख से जल अर्पण को लेकर है। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का संहार किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। चूंकि शंख उसी असुर का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवलिंग का अभिषेक शंख से नहीं किया जाता। प्रवासी भारतीयों के लिए इन सूक्ष्म नियमों को समझना उनकी धार्मिक जड़ों से जुड़ाव को और गहरा करता है। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शिव मंदिरों में पूजा करते समय इन मान्यताओं का ध्यान रखना न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे प्राचीन ग्रंथों के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक शोध को भी दर्शाता है।
अंततः, शिव पूजा का मूल आधार भाव है। जहां बेलपत्र और धतूरा महादेव को अत्यंत प्रिय हैं, वहीं इन पांच वर्जित चीजों का ध्यान रखकर श्रद्धालु अपनी पूजा को शास्त्रोक्त विधि से पूर्ण कर सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अनुष्ठान की शुद्धता और नियमों का पालन मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग को सुगम बनाता है।
संबंधित ख़बरें

राजनीति
राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को दी 20 दिन की पैरोल; इलाज के लिए जेल से बाहर आएंगे स्वयंभू धर्मगुरु
राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य आधार पर आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी है। अदालत ने राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
5 अग॰ 2026, 02:37 am

राजनीति
ड्रिंकिंग कल्चर और क्रिकेट: बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के बदलते व्यवहार पर साझा किए विचार
इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने स्पष्ट किया है कि पेशेवर क्रिकेट अब शराब की संस्कृति से दूर हो गया है, जबकि यूके के क्लब क्रिकेट में यह अब भी गहराई से जुड़ा है।
5 अग॰ 2026, 01:37 am

राजनीति
हरियाणा में दूषित पानी पर सियासत तेज: INLD नेता संपत सिंह ने सरकार को घेरा, 1,698 सैंपल जांच में हुए फेल
हरियाणा के पूर्व मंत्री संपत सिंह ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य में स्वच्छ पेयजल के दावों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण इलाकों में भारी संख्या में पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं।
5 अग॰ 2026, 12:37 am

