राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के श्रम का मूल्य क्यों तय किया? जानिए इस ऐतिहासिक फैसले के मायने
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 10:31 am

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गृहिणियों के घरेलू काम को आर्थिक मूल्य देते हुए इसे 'काल्पनिक आय' के रूप में मान्यता दी है, जो बीमा दावों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत के उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में घरेलू महिलाओं के श्रम को आर्थिक रूप से मापने और उसे मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक गृहिणी द्वारा परिवार के लिए किया गया योगदान किसी भी तरह से कार्यालय में काम करने वाले वेतनभोगी व्यक्ति से कम नहीं है। यह निर्णय न केवल कानूनी नजरिए से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की अदृश्य मेहनत को सम्मान देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
यह मामला एक दुखद सड़क दुर्घटना से उपजा था, जिसमें एक महिला की मृत्यु हो गई थी। जब मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के पास मुआवजे का मामला पहुंचा, तो बीमा कंपनियों ने तर्क दिया कि चूंकि मृतक महिला कोई प्रत्यक्ष आय नहीं कमा रही थी, इसलिए मुआवजा कम होना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक गृहिणी चौबीसों घंटे काम करती है और उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का बाजार मूल्य काफी अधिक होता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि 'काल्पनिक आय' (Notional Income) की गणना करते समय गृहिणी की शिक्षा, उम्र और उसके द्वारा किए जाने वाले कार्यों की प्रकृति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि खाना बनाना, सफाई करना, बच्चों की देखभाल और बुजुर्गों की सेवा करना ऐसे कार्य हैं जिनके लिए यदि बाहर से मदद ली जाए, तो भारी खर्च करना पड़ता है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में यह फैसला विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी 'अनपेड केयर वर्क' या बिना भुगतान वाले देखभाल कार्य पर व्यापक बहस होती रही है। प्रवासी परिवारों में, जहां अक्सर सहायता के लिए विस्तारित परिवार मौजूद नहीं होता, गृहिणियों पर काम का बोझ और भी अधिक होता है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट का यह रुख वैश्विक स्तर पर घरेलू श्रम के प्रति बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है।
यह फैसला लैंगिक समानता की दिशा में एक संवैधानिक मील का पत्थर है। यह स्थापित करता है कि घर के भीतर किया गया काम केवल 'प्रेम और स्नेह' का कार्य नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और परिवार की वित्तीय स्थिरता में एक ठोस योगदान है। भविष्य में, यह निर्णय दुर्घटना बीमा दावों के निपटारे के लिए एक मानक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि गृहिणियों के परिवारों को उचित न्याय और वित्तीय सुरक्षा मिले।
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