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कौन हैं नीरज शर्मा? भारतीय मूल के सीईओ की अमेरिकी नागरिकता खतरे में, धोखाधड़ी के लगे आरोप

ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 04:01 am
कौन हैं नीरज शर्मा? भारतीय मूल के सीईओ की अमेरिकी नागरिकता खतरे में, धोखाधड़ी के लगे आरोप

भारतीय मूल के सीईओ नीरज शर्मा सहित 17 लोगों पर अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है, जिसके बाद उनकी नागरिकता रद्द की जा सकती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय मूल के एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नीरज शर्मा सहित 17 व्यक्तियों की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी और गलत जानकारी के आधार पर अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की थी। यह घटनाक्रम न केवल अमेरिका, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है, जहाँ नागरिकता के कड़े नियम लागू हैं। नीरज शर्मा, जो अमेरिका में एक सफल व्यावसायिक इकाई का नेतृत्व कर रहे थे, उन लोगों की सूची में शामिल हैं जिन्हें 'डीनेचुरलाइजेशन' (नागरिकता की समाप्ति) की कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। जांचकर्ताओं का दावा है कि शर्मा ने अपने आवेदन के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया था। अमेरिकी कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति नागरिकता प्राप्त करते समय जानबूझकर झूठ बोलता है या किसी आपराधिक पृष्ठभूमि या पूर्व वीजा उल्लंघन को छुपाता है, तो उसकी नागरिकता किसी भी समय वापस ली जा सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई 'ऑपरेशन जानूस' के व्यापक दायरे में आती है, जिसका उद्देश्य उन प्रवासियों की पहचान करना है जिन्होंने अपनी पहचान बदलकर या अपनी उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) का रिकॉर्ड छुपाकर नागरिकता हासिल की है। शर्मा के मामले में, यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी पिछली कानूनी समस्याओं या निर्वासन की प्रक्रियाओं की जानकारी को छुपाया था, जो नागरिकता की पात्रता के लिए अनिवार्य थी। ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय के संदर्भ में, यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भी 'कैरेक्टर टेस्ट' और 'रेजीडेंसी' के कड़े नियम हैं। यदि कोई व्यक्ति नागरिकता आवेदन में गलत जानकारी देता है, तो ऑस्ट्रेलियाई गृह विभाग के पास धारा 34 के तहत नागरिकता रद्द करने का अधिकार होता है। भारतीय प्रवासियों को अक्सर यह सलाह दी जाती है कि वे अपने आव्रजन इतिहास के बारे में पूरी तरह से पारदर्शी रहें, क्योंकि दशकों बाद भी पुरानी धोखाधड़ी सामने आने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। फिलहाल, नीरज शर्मा और अन्य 16 व्यक्तियों के पास इन आरोपों के खिलाफ अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका होगा। हालांकि, यदि अदालत धोखाधड़ी के दावों की पुष्टि कर देती है, तो उन्हें न केवल अपनी अमेरिकी नागरिकता खोनी होगी, बल्कि उन्हें देश से निकाला भी जा सकता है। यह मामला दर्शाता है कि विकसित देशों में नागरिकता केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह पूर्ण सत्यनिष्ठा और कानूनी पालन पर आधारित एक जिम्मेदारी है।
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