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कौन हैं मेरेडिथ ओ'रूर्के? डोनाल्ड ट्रंप के 800 मिलियन डॉलर के चंदा नेटवर्क के पीछे की 'मास्टरमाइंड'
ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 11:35 am
डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक पुनरुत्थान के पीछे मेरेडिथ ओ'रूर्के का हाथ है, जिन्होंने उनके लिए 800 मिलियन डॉलर से अधिक का चंदा जुटाया है।
डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी राजनीति में वापसी केवल उनके भाषणों या रैलियों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक विशाल वित्तीय साम्राज्य खड़ा है। इस साम्राज्य की धुरी हैं मेरेडिथ ओ'रूर्के, जिन्हें अमेरिकी राजनीतिक हलकों में 'प्रिंसेस ऑफ डार्कनेस' के नाम से जाना जाता है। ओ'रूर्के ने ट्रंप के राजनीतिक और विरासत प्रोजेक्ट्स के लिए अब तक 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6700 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि जुटाई है। यह राशि न केवल अमेरिकी चुनाव के इतिहास में अभूतपूर्व है, बल्कि यह ट्रंप की सत्ता पर पकड़ को और भी मजबूत बनाती है।
फ्लोरिडा स्थित मेरेडिथ ओ'रूर्के पिछले कई दशकों से रिपब्लिकन पार्टी की एक अनुभवी रणनीतिकार रही हैं। उन्होंने ट्रंप के साथ तब जुड़ने का फैसला किया जब कई अन्य चंदा जुटाने वाले (फंडरेज़र) उनसे दूरी बना रहे थे। ओ'रूर्के की कार्यशैली उन्हें दूसरों से अलग बनाती है; वे प्रचार की चकाचौंध से दूर रहकर बड़े दानदाताओं और छोटे समर्थकों के बीच एक सेतु का काम करती हैं। ट्रंप के लिए उन्होंने 'सेव अमेरिका' जैसे संगठनों के माध्यम से भारी धन संचय किया है, जिसका उपयोग कानूनी लड़ाइयों से लेकर चुनाव प्रचार तक में किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओ'रूर्के की सफलता का राज उनकी वफादारी और काम करने का सटीक तरीका है। उन्हें 'प्रिंसेस ऑफ डार्कनेस' का खिताब उनकी गोपनीयता और बिना किसी शोर-शराबे के बड़े लक्ष्य हासिल करने की क्षमता के कारण मिला है। उनके नेटवर्क में अमेरिका के सबसे अमीर कारोबारी शामिल हैं, जो ट्रंप की नीतियों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल मानते हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए यह वित्तीय ताकत विशेष महत्व रखती है, क्योंकि ट्रंप की नीतियां क्वाड (QUAD) और ऑकस (AUKUS) जैसे समझौतों पर सीधा असर डालती हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए अमेरिकी राजनीति में आने वाला यह बदलाव काफी संवेदनशील है। ट्रंप के पास मौजूद यह विशाल कोष उन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों और आव्रजन (इमिग्रेशन) कानूनों को प्रभावित करने की शक्ति देता है। यदि ट्रंप इस धन के दम पर अपनी नीतियों को लागू करने में सफल रहते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव ऑस्ट्रेलिया-भारत व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ेगा। भारतीय मूल के उद्यमी और पेशेवर, जो सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे हैं, इस घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं।
अंततः, मेरेडिथ ओ'रूर्के केवल एक फंडरेज़र नहीं हैं, बल्कि वे ट्रंप की भावी योजनाओं की मुख्य वास्तुकार हैं। 800 मिलियन डॉलर का यह आंकड़ा केवल एक शुरुआत हो सकता है। जैसे-जैसे अमेरिकी चुनाव की सरगर्मियां बढ़ेंगी, ओ'रूर्के की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। उनकी रणनीतियां न केवल व्हाइट हाउस का रास्ता तय करेंगी, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक कूटनीति के समीकरण भी बदल सकती हैं।
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