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गैंगस्टर के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला सिपाही गिरफ्तार: गोरखपुर से चला रहा था नेटवर्क, 22 नाम आए सामने

ICN24 Newsroom 2 अग॰ 2026, 12:35 pm
गैंगस्टर के लिए फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला सिपाही गिरफ्तार: गोरखपुर से चला रहा था नेटवर्क, 22 नाम आए सामने

उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोरखपुर में तैनात एक सिपाही को गिरफ्तार किया है, जिसने पंजाब के कुख्यात गैंगस्टरों समेत 22 लोगों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने में मदद की थी।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने अपने ही विभाग के एक सिपाही को अंतरराष्ट्रीय अपराधियों और गैंगस्टरों की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी सिपाही शशिकांत यादव पर आरोप है कि उसने पंजाब और दिल्ली के खूंखार गैंगस्टरों सहित कुल 22 लोगों के फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए गलत सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया था। यह मामला तब प्रकाश में आया जब पंजाब के एक कुख्यात गैंगस्टर को इंडोनेशिया से डिपोर्ट कर वापस भारत लाया गया। पुलिस जांच के अनुसार, 2018 बैच का सिपाही शशिकांत यादव अगस्त 2023 में गोरखपुर के गोरखनाथ थाने में तैनात था। इसी दौरान उसने अपराधियों के साथ मिलकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया। जांच में पाया गया कि उसके कार्यकाल के दौरान कुल 45 पासपोर्ट सत्यापन किए गए थे, जिनमें से 22 पूरी तरह फर्जी पाए गए। इन सभी के नाम और पते गलत थे, लेकिन शशिकांत ने अपनी रिपोर्ट में इन्हें सही ठहराया था। इस मामले का मुख्य मोहरा पंजाब के अमृतसर का गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला बना। बिल्ला ने लच्छीपुर के फर्जी पते पर 'दीपू सिंह' के नाम से पासपोर्ट बनवाया और इसी के सहारे विदेश भागने में सफल रहा। हालांकि, इंडोनेशिया में पकड़े जाने और भारत डिपोर्ट होने के बाद जब सुरक्षा एजेंसियों ने उसके दस्तावेजों की जांच की, तो गोरखपुर पुलिस की मिलीभगत का पर्दाफाश हुआ। बिल्ला के अलावा, सिपाही ने दिल्ली और पंजाब के अन्य अपराधियों की भी मदद की थी। इसमें अमृतसर का दयाल मल्ल और दिल्ली का हरसिमरन सिंह उर्फ बादल शामिल है। बादल को दिसंबर 2024 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इन अपराधियों ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय पतों का उपयोग कर पासपोर्ट हासिल किए थे ताकि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें। गोरखपुर के एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि आरोपी सिपाही शशिकांत यादव मूल रूप से गाजीपुर जिले का रहने वाला है। उसे फरवरी 2025 में ही संदिग्ध गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया गया था और बाद में उसका तबादला जीआरपी में कर दिया गया था। पुलिस अब उस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है जो फर्जी दस्तावेज तैयार करने में सिपाही की मदद कर रहे थे। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाती है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि ऐसे आपराधिक तत्वों के फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश पहुंचने से समुदाय की छवि और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती है। उत्तर प्रदेश पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार सीमा पार किसी अन्य देश से भी जुड़े हैं।
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