ऑस्ट्रेलिया
वॉल स्ट्रीट में उछाल: अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में गिरावट से ब्याज दरें बढ़ने की आशंका थमी
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 02:37 am

अमेरिकी बाजार में तेजी देखी गई है क्योंकि जुलाई के रोजगार आंकड़ों में गिरावट के बाद अब सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो गई है।
अमेरिकी शेयर बाजार में आज कारोबारी सत्र की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। वैश्विक बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अमेरिका के ताज़ा रोजगार आंकड़ों ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है। जुलाई महीने की नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट से पता चला है कि इस अवधि के दौरान नौकरियों की संख्या में 23,000 की गिरावट आई है। हालांकि रोजगार में यह कमी सामान्यतः चिंता का विषय होती है, लेकिन वर्तमान मुद्रास्फीति के माहौल में इसे सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है क्योंकि इससे फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका काफी कम हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रम बाजार में यह नरमी इस बात का संकेत है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब ठंडी हो रही है, जो केंद्रीय बैंक की आक्रामक मौद्रिक नीति का ही परिणाम है। जब रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कम आते हैं, तो यह केंद्रीय बैंकों को अपनी ब्याज दर वृद्धि की गति को धीमा करने या रोकने का आधार प्रदान करता है। यही कारण है कि जैसे ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में प्रमुख सूचकांकों में उछाल देखा गया।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर काफी मायने रखती है। वैश्विक वित्तीय बाजारों का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था और यहाँ के शेयर बाजार (ASX) पर पड़ता है। यदि अमेरिका में ब्याज दरों में ठहराव आता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर निवेश का माहौल सुधरता है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के कई पेशेवर आईटी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े हैं, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर निर्भर हैं। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) भी अक्सर फेडरल रिजर्व के रुख को ध्यान में रखकर अपनी नीतियां बनाता है। अगर अमेरिका में दरें स्थिर रहती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया में भी बंधक दरों (mortgage rates) पर दबाव कम होने की उम्मीद की जा सकती है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों को अपने होम लोन की किश्तों में राहत मिल सकती है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह डेटा 'गोल्डीलॉक्स' स्थिति की ओर इशारा कर रहा है—जहाँ अर्थव्यवस्था न तो बहुत गर्म है और न ही बहुत ठंडी। हालांकि, जुलाई में 23,000 नौकरियों की कमी एक बड़ा आंकड़ा है, लेकिन निवेशकों ने इसे मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई में एक जीत के रूप में लिया है। अब सबकी निगाहें फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर टिकी हैं।
सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि मुद्रा बाजार में भी इसकी हलचल देखी गई। डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में मजबूती आई है, जिससे भारत को भेजी जाने वाली रकम (remittance) और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की विनिमय दर पर भी प्रभाव पड़ सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जो भारत में निवेश करते हैं या अपने परिजनों को पैसे भेजते हैं, उनके लिए आने वाले दिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए महत्वपूर्ण होंगे। कुल मिलाकर, वॉल स्ट्रीट की यह तेजी फिलहाल वैश्विक निवेशकों के लिए सुकून लेकर आई है।
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