ऑस्ट्रेलिया
क्वींसलैंड में स्किन कैंसर का बढ़ता खतरा: शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, भारतीय समुदाय के लिए भी चेतावनी
ICN24 Newsroom 1 जुल॰ 2026, 08:55 am
एक नए शोध के अनुसार क्वींसलैंड में मध्यम आयु वर्ग के लोग सालाना 15 लाख स्किन कैंसर प्रक्रियाओं से गुजर रहे हैं, जो प्रवासी भारतीयों के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य से सामने आए एक हालिया शोध ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। शोध के आंकड़ों के अनुसार, क्वींसलैंड में मध्यम आयु वर्ग के लोग हर साल लगभग 15 लाख स्किन कैंसर प्रक्रियाओं (Skin Cancer Procedures) से गुजर रहे हैं। इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक 'वेक-अप कॉल' या चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। क्वींसलैंड को लंबे समय से दुनिया की 'स्किन कैंसर राजधानी' माना जाता रहा है, लेकिन नई रिपोर्ट इस समस्या की भयावहता को और अधिक स्पष्टता से दर्शाती है।
यह शोध विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित है जो 40 से 65 वर्ष की आयु के बीच हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा के कैंसर के मामलों की यह संख्या न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी बोझ डाल रही है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि धूप से होने वाला नुकसान दशकों तक संचित होता है और बाद के जीवन में गंभीर रूप ले लेता है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षात्मक उपाय नहीं अपनाए गए, तो यह संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। अक्सर एक आम धारणा या 'मिथक' प्रचलित है कि गहरे रंग की त्वचा (Melanin-rich skin) वाले लोगों को स्किन कैंसर का खतरा कम होता है। हालांकि यह सच है कि मेलेनिन कुछ हद तक यूवी किरणों से सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की अत्यधिक तीव्र पराबैंगनी (UV) किरणें किसी भी त्वचा के प्रकार को नुकसान पहुंचा सकती हैं। भारतीय प्रवासियों को यह समझने की आवश्यकता है कि ऑस्ट्रेलिया का सूर्य उनके गृह देश की तुलना में कहीं अधिक तीखा है, और यहाँ की ओजोन परत की स्थिति जोखिम को और बढ़ा देती है।
डॉक्टरों का कहना है कि भारतीय मूल के लोगों में स्किन कैंसर का पता अक्सर काफी देरी से चलता है, क्योंकि वे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या यह मान लेते हैं कि वे सुरक्षित हैं। त्वचा पर उभरने वाले नए तिल, पुराने तिलों के रंग में बदलाव, या ऐसे घाव जो जल्दी ठीक नहीं हो रहे हों, उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए। क्वींसलैंड की जीवनशैली में बाहरी गतिविधियों का बहुत महत्व है, ऐसे में क्रिकेट खेलने, समुद्र किनारे जाने या गार्डनिंग करने के दौरान धूप से बचाव अनिवार्य है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बढ़ते बोझ को कम करने के लिए 'स्लिप, स्लॉप, स्लैप, सीक और स्लाइड' (Slip, Slop, Slap, Seek, Slide) के मंत्र को अपनाने पर जोर दिया है। इसमें लंबी आस्तीन के कपड़े पहनना, सनस्क्रीन का उदारतापूर्वक उपयोग करना, हैट पहनना, छाया में रहना और धूप का चश्मा लगाना शामिल है। इसके अलावा, सालाना स्किन चेकअप करवाना अब एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है।
अंत में, यह शोध केवल एक सांख्यिकीय डेटा नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर सावधानी बरतने का एक स्पष्ट संदेश है। क्वींसलैंड का भारतीय समुदाय जो इस धूप वाले राज्य को अपना घर कहता है, उसे अपनी त्वचा के स्वास्थ्य के प्रति सचेत होना चाहिए। शुरुआती पहचान ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है, और नियमित जांच के माध्यम से कई जटिलताओं को समय रहते रोका जा सकता है।
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