ऑस्ट्रेलिया
डिजिटल बाड़: अब स्मार्टफोन ऐप के जरिए अपने मवेशियों का प्रबंधन कर रहे हैं ऑस्ट्रेलियाई किसान
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 11:36 am

ऑस्ट्रेलियाई कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आ रहा है, जहाँ किसान अब घोड़ों या मोटरबाइकों के बजाय स्मार्टफोन ऐप और जीपीएस कॉलर के जरिए अपने मवेशियों को नियंत्रित कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि की तस्वीर तेजी से बदल रही है। सदियों से चले आ रहे पारंपरिक तरीकों, जैसे घोड़ों या मोटरबाइकों पर सवार होकर मवेशियों को इकट्ठा करना या चराना, की जगह अब आधुनिक तकनीक ले रही है। ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में किसान अब अपनी उंगलियों के इशारे पर, यानी एक स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से अपने पशुओं के झुंड का प्रबंधन कर रहे हैं। इस तकनीक को 'वर्चुअल फेंसिंग' या डिजिटल बाड़ेबंदी कहा जा रहा है, जो कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।
वर्चुअल फेंसिंग की यह प्रणाली जीपीएस (GPS) तकनीक और पशुओं के गले में बंधे विशेष कॉलर पर आधारित है। किसान अपने मोबाइल ऐप पर एक नक्शा देखते हैं और वहां एक अदृश्य सीमा या रेखा खींच देते हैं। जैसे ही कोई जानवर इस काल्पनिक रेखा के पास पहुंचता है, उसके कॉलर से एक चेतावनी ध्वनि निकलती है। यदि जानवर फिर भी आगे बढ़ता है, तो उसे एक हल्का सा इलेक्ट्रॉनिक पल्स (झटका) लगता है, जो उसे वापस सुरक्षित क्षेत्र में जाने का संकेत देता है। यह तकनीक न केवल पशुओं को सुरक्षित रखती है, बल्कि किसानों को मीलों तक दौड़ने की थकान से भी बचाती है।
इस तकनीक के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी महत्वपूर्ण हैं। पारंपरिक बाड़ लगाने में भारी खर्च और रखरखाव की आवश्यकता होती है। वर्चुअल फेंसिंग के जरिए किसान अब आसानी से चराई क्षेत्रों (paddock) को बदल सकते हैं, जिससे जमीन की उर्वरता बनी रहती है और चारे का बेहतर प्रबंधन होता है। इसके अलावा, यह तकनीक संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों, जैसे नदियों के किनारे या नए लगाए गए पेड़ों को पशुओं से बचाने में भी सहायक है। मिट्टी के कटाव को रोकने और जल संसाधनों के संरक्षण में यह एक बड़ा हथियार बनकर उभरी है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो तेजी से क्षेत्रीय क्षेत्रों में व्यवसाय और कृषि की ओर बढ़ रहे हैं, यह तकनीक विशेष महत्व रखती है। भारत में भी पशुपालन और कृषि का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में तकनीक का यह समावेश कृषि को एक 'स्मार्ट बिजनेस' में बदल रहा है। कई भारतीय उद्यमी और एग्रो-टेक विशेषज्ञ अब इस तरह की तकनीकों के विकास और कार्यान्वयन में रुचि दिखा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में श्रम की कमी को देखते हुए, यह तकनीक कम जनशक्ति के साथ बड़े खेतों के प्रबंधन को संभव बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्चुअल फेंसिंग केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम अनिश्चित हो रहा है, किसानों को अपने संसाधनों का अधिक कुशलता से प्रबंधन करने की आवश्यकता है। हालांकि, शुरुआत में इसके उपकरण महंगे हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में यह श्रम, सामग्री और समय की बड़ी बचत करता है। ऑस्ट्रेलिया का यह कृषि मॉडल अब दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन रहा है, जहाँ तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है।
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