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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला खेलों में केवल जैविक महिलाओं को अनुमति देने वाले राज्यों के कानूनों को दी हरी झंडी

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 06:31 pm
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिला खेलों में केवल जैविक महिलाओं को अनुमति देने वाले राज्यों के कानूनों को दी हरी झंडी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने वेस्ट वर्जीनिया के उस कानून को बरकरार रखा है जो महिला खेल प्रतियोगिताओं को केवल जैविक महिलाओं तक सीमित करता है, जिसका असर वैश्विक खेल नीतियों पर पड़ सकता है।

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वेस्ट वर्जीनिया के उस कानून को सुरक्षा प्रदान की है, जो महिलाओं और लड़कियों की खेल प्रतियोगिताओं को केवल जैविक महिलाओं (Biological Females) तक सीमित करता है। 'वेस्ट वर्जीनिया बनाम बी.पी.जे.' (West Virginia v. B.P.J.) मामले में अदालत का यह फैसला उन 27 राज्यों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने हाल के वर्षों में इसी तरह के कानून पारित किए हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संविधान का 'समान संरक्षण खंड' (Equal Protection Clause) और शिक्षा में भेदभाव को रोकने वाला संघीय कानून 'टाइटल IX' (Title IX), राज्यों को महिला खेलों की सुरक्षा के लिए नियम बनाने से नहीं रोकता। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब वेस्ट वर्जीनिया ने 'सेव वूमेंस स्पोर्ट्स एक्ट' पारित किया, जिसे एक ट्रांसजेंडर छात्रा ने अदालत में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह कानून उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है और उन्हें उनकी पहचान के आधार पर खेल से बाहर करता है। हालांकि, अदालत ने अपने रुख में यह संकेत दिया है कि खेल प्रतियोगिताओं में निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जैविक अंतर को आधार बनाना कानूनी रूप से वैध हो सकता है। कानून के समर्थकों का तर्क है कि जैविक रूप से पुरुषों के रूप में जन्मे एथलीटों को महिला वर्ग में शामिल करने से महिलाओं के लिए अवसर कम हो जाते हैं और सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं। दूसरी ओर, मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह निर्णय समावेशिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए इस फैसले के गहरे निहितार्थ हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में भारतीय समुदाय के बच्चे स्थानीय खेल क्लबों और लीगों में बहुत सक्रिय हैं। ऑस्ट्रेलिया में 'ह्यूमन राइट्स कमीशन' और विभिन्न खेल संस्थाएं (जैसे AFL) वर्तमान में ट्रांसजेंडर एथलीटों के लिए दिशा-निर्देशों पर बहस कर रही हैं। अमेरिका का यह कानूनी मिसाल भविष्य में ऑस्ट्रेलिया की खेल नीतियों और सामुदायिक क्लबों के नियमों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक स्तर पर ओलंपिक समितियों और अंतरराष्ट्रीय खेल संघों में इस विषय पर पहले से ही मंथन चल रहा है। भारतीय मूल के माता-पिता, जो अपने बच्चों को प्रतिस्पर्धी खेलों में प्रोत्साहित करते हैं, वे खेल के मैदान पर निष्पक्षता और सुरक्षा के इन वैश्विक मानकों को करीब से देख रहे हैं। यह फैसला आने वाले समय में लैंगिक पहचान और एथलेटिक प्रतिस्पर्धा के बीच के संतुलन पर नई बहस छेड़ेगा।
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