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ईरान के साथ समझौते की तैयारी: हॉर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-मुक्त खोलने और समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने पर बनी सहमति

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 04:31 pm
ईरान के साथ समझौते की तैयारी: हॉर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-मुक्त खोलने और समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने पर बनी सहमति

अमेरिका ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद जताई है, जिसके तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के व्यापार के लिए खोला जाएगा।

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक 'ऐतिहासिक' समझौते की ओर बढ़ रहे हैं। इस संभावित समझौते का मुख्य केंद्र सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए पूरी तरह खोलना है। अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते की अनिवार्य शर्त यह है कि ईरान इस जलमार्ग को बिना किसी टोल या शुल्क के अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए उपलब्ध कराएगा। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जैसे ही ईरान इस जलमार्ग को खोलता है, अमेरिका अपनी ओर से लगाई गई नाकेबंदी को हटा लेगा। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होगी। इसके अगले चरण में इस क्षेत्र से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने (Demining) का काम शुरू किया जाएगा। इस अभियान में ब्रिटेन और फ्रांस जैसे जी-7 देश सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिन्होंने पहले ही अपने जहाज इस क्षेत्र के करीब तैनात कर दिए हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और वैश्विक व्यापार के नजरिए से यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है, और इसकी सुरक्षा सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है। इस क्षेत्र में शांति और मुक्त व्यापार सुनिश्चित होने से ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे ऊर्जा-आयात करने वाले देशों को बड़ी राहत मिल सकती है। इधर, फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि दोनों नेता एक संभावित व्यापार समझौते (Trade Deal) पर चर्चा करेंगे। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि इस बैठक में किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन तकनीकी चर्चाओं को आगे बढ़ाने और भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए यह मुलाकात महत्वपूर्ण साबित होगी। अमेरिका की योजना भारत को ऊर्जा, औद्योगिक उत्पाद और कृषि उत्पादों के बड़े निर्यात बाजार के रूप में देखने की है। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वे स्वयं आने वाले हफ्तों में भारत का दौरा करेंगे ताकि व्यापारिक बाधाओं को दूर किया जा सके। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक आर्थिक भागीदार हैं, और एक बेहतर व्यापारिक समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इसके अलावा, जी-7 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप खनिज आपूर्ति श्रृंखला, अवैध प्रवासन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे मुद्दों पर भी वैश्विक नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, कतर के अमीर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के साथ भी अलग से मुलाकात करेंगे, जो पश्चिम एशिया की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अहम है।
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