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अमेरिका: एच-1बी वीजा के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल करने पर रोक की तैयारी, संसद में पेश हुआ नया विधेयक
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 02:00 pm

अमेरिकी संसद में पेश एक नए प्रस्ताव में एच-1बी वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है।
वाशिंगटन: अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एक नया विधायी प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य एच-1बी वीजा के माध्यम से स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की दशकों पुरानी प्रक्रिया को समाप्त करना है। यदि यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो इसका सीधा असर उन कुशल कामगारों पर पड़ेगा जो वर्षों से अमेरिकी नागरिकता की उम्मीद में वहां काम कर रहे हैं।
इस विधेयक को पेश करने वाले सांसदों का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था का उपयोग बड़ी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कामगारों को लाने के लिए कर रही हैं, जिससे अमेरिकी श्रमिकों के हितों को नुकसान पहुंचता है। प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि कार्य-आधारित आव्रजन (Employment-based Immigration) को पूरी तरह से बदला जाना चाहिए ताकि घरेलू श्रम बाजार को प्राथमिकता दी जा सके। वर्तमान में, एच-1बी वीजा धारकों का एक बड़ा हिस्सा भारतीय तकनीकी पेशेवरों का है, जो ग्रीन कार्ड के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची (Backlog) का सामना कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि जब अमेरिका अपनी वीजा नीतियों को सख्त करता है, तो भारतीय कुशल पेशेवरों का झुकाव ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की ओर बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया का 'प्वॉइंट्स-बेस्ड' सिस्टम और पीआर (स्थायी निवास) की स्पष्ट राह इसे अमेरिकी अनिश्चितता के बीच एक आकर्षक विकल्प बनाती है। मेलबर्न और सिडनी में बसे भारतीय समुदाय के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े अमेरिकी कानूनों से ऑस्ट्रेलिया को ग्लोबल टैलेंट आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे कानून बनने के लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों से पारित होना अनिवार्य है। आव्रजन विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी उद्योग जगत और सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों की ओर से कड़ा विरोध देखने को मिल सकता है। टेक कंपनियां लंबे समय से एच-1बी कोटा बढ़ाने और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सुगम बनाने की वकालत करती रही हैं ताकि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमागों को अपने साथ जोड़ सकें।
भारतीय विदेश मंत्रालय और विभिन्न प्रवासी संगठन इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि अमेरिका में काम करने वाले प्रवासी भारतीय न केवल देश को विदेशी मुद्रा (Remittances) भेजते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। आने वाले महीनों में इस विधेयक पर होने वाली बहस यह तय करेगी कि अमेरिका भविष्य में विदेशी प्रतिभाओं के लिए अपने दरवाजे कितने खुले रखता है।
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