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ओमान और ईरान के बीच 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' पर चर्चा: 128% खाद्य मुद्रास्फीति से जूझ रहे ईरान को नए प्रतिबंधों का डर

ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 10:37 pm
ओमान और ईरान के बीच 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' पर चर्चा: 128% खाद्य मुद्रास्फीति से जूझ रहे ईरान को नए प्रतिबंधों का डर

ओमान और ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा पर चर्चा की है, जबकि ईरान 128% की खाद्य मुद्रास्फीति और नए अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे से जूझ रहा है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ओमान और ईरान ने 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में नौवहन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक 'संयुक्त घोषणा' पर चर्चा शुरू की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान न केवल इजरायल के साथ सैन्य टकराव की स्थिति में है, बल्कि उसे अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले संभावित नए कड़े प्रतिबंधों का भी डर सता रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग माना जाता है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ओमान और ईरान के बीच यह कूटनीतिक बातचीत हाल ही में एक अज्ञात वस्तु द्वारा एक जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद तेज हुई है। समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार के व्यवधान का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ेगा। आंतरिक रूप से ईरान एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, देश में खाद्य मुद्रास्फीति (food inflation) रिकॉर्ड 128% तक पहुंच गई है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों ने ईरानी समाज में व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका नए आर्थिक प्रतिबंध लागू करता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है, जिससे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और अशांति की संभावना बढ़ जाएगी। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह संकट कई मायनों में महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों और आपूर्ति श्रृंखला के लिए काफी हद तक वैश्विक समुद्री मार्गों पर निर्भर है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और मुद्रास्फीति पर पड़ेगा। इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और वहां से आने वाला प्रेषण (remittance) भी भारत और भारतीय परिवारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इजरायल और ईरान के बीच सीधे युद्ध की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को भी सक्रिय कर दिया है। ओमान, जो ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, अब ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ टकराव से बचने और समुद्री व्यापार को सुचारू रखने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, तेहरान की ओर से आने वाले बयान संकेत देते हैं कि वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले सप्ताह वैश्विक भू-राजनीति और विशेष रूप से ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
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