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अमेरिकी संसद में आप्रवासन पर तीखी बहस: रिपब्लिकन सांसद ने गवाह से पूछा- 'क्या आप विरोध प्रदर्शनों के लिए फंड देते हैं?'

ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 02:31 am
अमेरिकी संसद में आप्रवासन पर तीखी बहस: रिपब्लिकन सांसद ने गवाह से पूछा- 'क्या आप विरोध प्रदर्शनों के लिए फंड देते हैं?'

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आप्रवासन संबंधी सुनवाई के दौरान सांसद एंडी बिग्स और एनडीएलओएन के निदेशक क्रिस न्यूमैन के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग पर सवाल उठाए गए।

वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की एक हालिया सुनवाई के दौरान आप्रवासन नीति को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया। रिपब्लिकन सांसद एंडी बिग्स ने 'नेशनल डे लेबरर ऑर्गेनाइजिंग नेटवर्क' (NDLON) के कानूनी निदेशक क्रिस न्यूमैन के साथ तीखी बहस की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र यह सवाल था कि क्या गैर-लाभकारी संगठन अवैध आप्रवासन के समर्थन में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित कर रहे हैं। सांसद बिग्स ने कड़े लहजे में न्यूमैन से पूछा कि क्या उनका संगठन उन गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराता है जो कानून प्रवर्तन और सीमा नियंत्रण नीतियों में बाधा डालती हैं। यह बहस उस समय और अधिक उग्र हो गई जब बिग्स ने न्यूमैन पर सीधे आरोप लगाते हुए पूछा, 'आप इन विरोध प्रदर्शनों को फंड करने में मदद करते हैं, है न?' इस सवाल ने सदन में मौजूद सदस्यों और दर्शकों के बीच हलचल पैदा कर दी। न्यूमैन ने इन आरोपों का जवाब देते हुए संगठन की कानूनी और नागरिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का बचाव किया। आप्रवासन का यह मुद्दा न केवल अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के महीनों में वीज़ा नीतियों और सीमा नियंत्रण को लेकर कड़े कानून लागू किए गए हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आप्रवासन के प्रति राजनीतिक दृष्टिकोण बदल रहा है। अमेरिकी संसद की यह बहस दर्शाती है कि कैसे विकसित देश अब आप्रवासन के सामाजिक और वित्तीय पहलुओं पर अधिक सूक्ष्मता से नज़र रख रहे हैं। NDLON जैसे संगठनों का तर्क है कि वे केवल हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों की वकालत कर रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन सांसदों का मानना है कि ऐसे संगठन मौजूदा कानूनों के प्रवर्तन में जटिलताएं पैदा करते हैं। इस सुनवाई ने एक बार फिर अमेरिका में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच की गहरी खाई को उजागर कर दिया है। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, भारतीय समुदाय अक्सर स्थायी निवास (PR) और कुशल श्रमिक वीज़ा की मांग करता है। अमेरिका में आप्रवासन पर हो रही इस तरह की तीखी बहसें अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नीतिगत बदलावों की लहर पैदा करती हैं, जिसका प्रभाव अन्य पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, इस सुनवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे आप्रवासन सुधारों की फंडिंग पर एक नई राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है।
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