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H-1B वीजा धारकों को बड़ी राहत: अमेरिकी अदालत ने रद्द किया ट्रंप प्रशासन का $1 लाख फीस का प्रस्ताव
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 04:00 pm

अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की भारी-भरकम फीस को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है।
अमेरिकी न्यायपालिका ने एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसके तहत H-1B वीजा पर लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) की भारी शुल्क लगाने की योजना थी। कोर्ट के इस निर्णय से न केवल अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को राहत मिली है, बल्कि उन हजारों आईटी विशेषज्ञों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भी रास्ता साफ हो गया है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं के आवागमन पर निर्भर हैं।
अमेरिकी जिला न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा प्रस्तावित यह शुल्क वृद्धि कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करती है और यह कुशल कामगारों के लिए एक अनुचित बाधा पैदा करती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्किल्ड माइग्रेशन और वीजा नीतियों पर गहन चर्चा हो रही है। यदि यह नियम लागू हो जाता, तो टेक कंपनियों के लिए भारतीय इंजीनियरों को नियुक्त करना आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता, जिससे सीधे तौर पर भारत के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता।
भारतीय समुदाय के लिए इस फैसले के गहरे मायने हैं। भारत हर साल अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले कुल H-1B वीजा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करता है। यह वीजा भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और डेटा वैज्ञानिकों के लिए अमेरिकी स्वप्न को साकार करने का सबसे बड़ा माध्यम है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर उत्साहजनक है, क्योंकि कई पेशेवर अक्सर ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच करियर के अवसरों के लिए प्रवास करते रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक फीस का उद्देश्य प्रत्यक्ष रूप से विदेशी कामगारों के प्रवेश को हतोत्साहित करना था। ट्रंप प्रशासन ने 'बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन' नीति के तहत इस तरह के कड़े प्रावधानों की वकालत की थी। हालांकि, टेक जगत के दिग्गजों और विभिन्न औद्योगिक निकायों ने इसके खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसमें तर्क दिया गया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाएं अनिवार्य हैं।
इस अदालती जीत के बाद अब भारतीय आईटी कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होगा। इसके साथ ही, उन छात्रों और शुरुआती करियर वाले पेशेवरों में भी सुरक्षा की भावना जगी है जो अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रतिभाओं की मांग और उनके योगदान को नजरअंदाज करना किसी भी विकसित राष्ट्र के लिए आसान नहीं है। आने वाले समय में, यह उम्मीद की जा रही है कि वीजा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरलता बनी रहेगी, जो भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी।
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