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UPI और NPI का मिलन: भारत-नेपाल के बीच आसान हुई डिजिटल मनी ट्रांसफर की राह

ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 06:00 am
UPI और NPI का मिलन: भारत-नेपाल के बीच आसान हुई डिजिटल मनी ट्रांसफर की राह

भारत और नेपाल के बीच अब डिजिटल लेनदेन और भी सुगम हो गया है। यूपीआई और एनपीआई के जुड़ाव से पर्यटकों और प्रवासी कामगारों को तुरंत फंड ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी।

भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के बीच हुए नए एकीकरण ने दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन की परिभाषा बदल दी है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ, अब भारत और नेपाल के नागरिक मोबाइल बैंकिंग ऐप और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से तुरंत धन हस्तांतरण कर सकेंगे। यह पहल विशेष रूप से उन लाखों प्रवासी श्रमिकों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए वरदान साबित होगी जो दैनिक आधार पर सीमा पार लेनदेन पर निर्भर हैं। इस नई व्यवस्था के तहत, भारतीय उपयोगकर्ता नेपाल में क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान कर सकते हैं, जबकि नेपाली नागरिक भी भारत में इसी तरह की सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे पहले, सीमा पार पैसे भेजने के लिए पारंपरिक बैंकिंग चैनलों या अनौपचारिक रास्तों का उपयोग करना पड़ता था, जो न केवल समय लेने वाले थे बल्कि उनमें शुल्क भी अधिक लगता था। अब, एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) और नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) के बीच इस सहयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को सस्ता, तेज और पारदर्शी बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी क्रांति लाएगा। नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों को अब भारी मात्रा में नकदी ले जाने या मुद्रा विनिमय (currency exchange) की झंझट से मुक्ति मिलेगी। डिजिटल भुगतान की यह सुगमता भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए भी एक उदाहरण पेश करती है। हालांकि यह सुविधा फिलहाल भारत-नेपाल के लिए है, लेकिन भारत सरकार जिस तरह से सिंगापुर, यूएई और अब नेपाल के साथ यूपीआई का विस्तार कर रही है, उससे भविष्य में ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ भी इसी तरह के सुव्यवस्थित प्रेषण (remittance) तंत्र की उम्मीदें बढ़ गई हैं। प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लोगों के लिए, प्रेषण की लागत एक बड़ा मुद्दा रही है। भारत-नेपाल मॉडल यह दर्शाता है कि कैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से मध्यस्थों को हटाकर लागत कम की जा सकती है। यदि इसी तरह का मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से अपनाया जाता है, तो यह वैश्विक प्रेषण बाजार को पूरी तरह से बदल सकता है। निष्कर्ष के तौर पर, यूपीआई-एनपीआई का जुड़ाव केवल तकनीक का मिलन नहीं है, बल्कि यह दो देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और करीब लाने का एक सशक्त माध्यम है। यह कदम वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी जीत है, जिससे छोटे व्यापारियों और निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को सबसे अधिक लाभ होगा।
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