राजनीति
झूठे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अभिनेत्री उपासना सिंह का बड़ा बयान, 'मी टू' मुहिम के दुरुपयोग पर जताई चिंता
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 09:30 pm

लोकप्रिय अभिनेत्री उपासना सिंह ने झूठे यौन उत्पीड़न के मामलों और निर्दोषों को फंसाने वाली प्रवृत्तियों पर अपनी राय साझा की है।
भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री उपासना सिंह ने हाल ही में यौन उत्पीड़न के झूठे मामलों पर अपनी बेबाक राय साझा की है। मनोरंजन उद्योग में चल रही विभिन्न चर्चाओं और 'हेमा कमेटी' की रिपोर्ट के बाद उपजे विवादों के बीच, उपासना सिंह का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जहां वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलना अनिवार्य है, वहीं किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर झूठे आरोप लगाकर उसे बदनाम करना समाज और कानून के लिए घातक साबित हो सकता है।
उपासना सिंह, जिन्हें 'द कपिल शर्मा शो' और कई लोकप्रिय फिल्मों में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है, ने कहा कि 'मी टू' (Me Too) जैसी मुहिम महिलाओं को सशक्त बनाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कुछ लोग व्यक्तिगत लाभ या आपसी रंजिश निकालने के लिए इन गंभीर प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, जब एक भी झूठा मामला सामने आता है, तो वह उन सैकड़ों वास्तविक पीड़ितों की आवाज़ को कमजोर कर देता है जो सच में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है। हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया के कार्यस्थलों और सामाजिक ढांचे में भी यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कड़े कानून लागू किए गए हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच इस बात को लेकर अक्सर बहस होती है कि न्याय प्रणाली को इतना संतुलित कैसे रखा जाए कि दोषी को सजा मिले लेकिन निर्दोष की सामाजिक प्रतिष्ठा सुरक्षित रहे। उपासना सिंह का तर्क है कि फिल्म उद्योग हो या कोई भी अन्य कार्यक्षेत्र, आरोपों की गहराई से जांच होनी चाहिए और बिना सबूत के किसी को भी मीडिया ट्रायल का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
अभिनेत्री ने आगे कहा कि मनोरंजन जगत में प्रतिष्ठा कमाना वर्षों की मेहनत का परिणाम होता है, लेकिन एक गलत आरोप इसे चंद मिनटों में नष्ट कर सकता है। उन्होंने युवा कलाकारों और कामकाजी महिलाओं से अपील की कि वे अपनी गरिमा बनाए रखें और कानून का उपयोग केवल न्याय के लिए करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म जगत में अधिकांश लोग पेशेवर हैं और कुछ काली भेड़ों की वजह से पूरे उद्योग को बदनाम करना उचित नहीं है।
अंत में, उपासना सिंह ने पारदर्शी जांच प्रणालियों की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कानून का दुरुपयोग रोका जा सके। उनका यह बयान न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रह रहे भारतीय प्रवासियों के बीच भी एक नई बहस को जन्म दे रहा है, जहां पेशेवर नैतिकता और व्यक्तिगत सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती बनी हुई है।
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