राजनीति
यूपी चुनाव से पहले महिला वोटरों को साधने की तैयारी, योगी सरकार बड़े 'तोहफे' पर कर रही मंथन
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 12:37 pm
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार महिला मतदाताओं के लिए एक बड़ी कल्याणकारी योजना लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य 'आधी आबादी' का समर्थन हासिल करना है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की 'आधी आबादी' यानी महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार महिलाओं के लिए किसी बड़ी कल्याणकारी योजना या आर्थिक पैकेज की घोषणा कर सकती है। इस संभावित कदम को चुनावों से पहले महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच इस मुद्दे पर गहन मंथन चल रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य उन महिला मतदाताओं को सीधे लाभ पहुँचाना है, जो हाल के वर्षों में एक स्वतंत्र और निर्णायक वोट बैंक के रूप में उभरी हैं। मध्य प्रदेश में 'लाडली बहना' योजना और महाराष्ट्र में 'लाडकी बहण' योजना की सफलता ने पार्टी को यह विश्वास दिलाया है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार करना चुनावी जीत की कुंजी साबित हो सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में महिला सुरक्षा और कल्याण हमेशा से बड़े मुद्दे रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, जैसे उज्ज्वला योजना, पीएम आवास और मुफ्त राशन वितरण ने पहले ही महिलाओं के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत की है। अब सरकार एक ऐसी विशिष्ट योजना लाने पर विचार कर रही है जो सीधे तौर पर महिलाओं के हाथ में नकदी या विशेष सुविधाएं पहुंचा सके। इसमें मासिक आर्थिक सहायता या उच्च शिक्षा और उद्यमिता के लिए विशेष अनुदान शामिल हो सकते हैं।
इस राजनीतिक हलचल का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच भी इसकी चर्चा है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश मूल के लोग, अपने गृह राज्य की राजनीति और विकास कार्यों पर करीबी नजर रखते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासियों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल चुनावी लाभ के लिए होती हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर सामाजिक बदलाव लाने में भी सहायक हो सकती हैं।
विपक्ष ने सरकार के इस कदम पर कटाक्ष करते हुए इसे चुनावी हथकंडा करार दिया है। हालांकि, बीजेपी इस रणनीति को 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र से जोड़कर देख रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार इस 'मंथन' से क्या अमृत निकालती है और यह आगामी चुनावों के नतीजों को किस हद तक प्रभावित करता है। फिलहाल, यूपी की महिलाओं की नजरें सरकार के अगले बड़े ऐलान पर टिकी हैं।
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