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ग्रीन कार्ड आवेदकों को देश छोड़ने का सुझाव: ट्रंप के फैसले पर टेक दिग्गजों ने जताई चिंता
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 05:00 am

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्रीन कार्ड आवेदकों को अपने देश वापस भेजने के प्रस्ताव पर अमेरिकी टेक कंपनियों और चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कड़ा ऐतराज जताया है।
वॉशिंगटन और सिडनी: अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसा प्रस्ताव सामने रखा था जिसमें ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे विदेशी पेशेवरों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान अपने देश वापस लौटने का सुझाव दिया गया था। इस कदम ने न केवल अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय, बल्कि वहां की दिग्गज टेक कंपनियों और बिजनेस चैंबर ऑफ कॉमर्स को भी चौकन्ना कर दिया है।
अमेरिकी टेक उद्योग और यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने व्हाइट हाउस को इस संबंध में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के कड़े कदम से देश की अर्थव्यवस्था और नवाचार की गति को भारी नुकसान हो सकता है। टेक दिग्गजों का तर्क है कि यदि कुशल पेशेवर अमेरिका छोड़कर जाते हैं, तो इससे प्रतिभाओं का पलायन (ब्रेन ड्रेन) होगा और चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय है। कई भारतीय परिवार ऐसे हैं जिनके रिश्तेदार अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में बसे हुए हैं। अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक लेबर मार्केट पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में भी स्किल्ड माइग्रेशन और वीजा नीतियों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, ऐसे में अमेरिका का यह रुख एक वैश्विक उदाहरण पेश कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों, जिनमें से अधिकांश भारतीय हैं, के लिए यह स्थिति अनिश्चितता पैदा करती है। ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची पहले से ही दशकों लंबी है, और ऐसे में घर वापस जाने का निर्देश उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन को तबाह कर सकता है। सीईओ के समूह ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को दुनिया भर की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए अपनी नीतियों को सरल और आकर्षक बनाए रखने की आवश्यकता है।
व्यापारिक संगठनों ने व्हाइट हाउस को भेजे अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया है कि इमिग्रेशन केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश, जो वर्तमान में अपनी आव्रजन प्रणालियों में सुधार कर रहे हैं, अक्सर कुशल कार्यबल को आकर्षित करने के लिए अमेरिका की कमियों का लाभ उठाते हैं। यदि अमेरिका अपने द्वार बंद करता है, तो कुशल भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया या कनाडा जैसे अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
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