राजनीति
पनामा नहर पर चीन की बढ़ती सक्रियता से अमेरिका अलर्ट, डोनाल्ड ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 03:31 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को पनामा नहर से दूर रहने की कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस सामरिक जलमार्ग पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त तेवरों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने चीन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह पनामा नहर पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश न करे। वाशिंगटन में एक संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है और अमेरिका इसे किसी भी स्थिति में चीन के प्रभाव में नहीं आने देगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, ‘ऐसा करने के बारे में सोचना भी मत।’
पनामा नहर, जो अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है, वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। हालांकि यह नहर पनामा के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का इस पर गहरा प्रभाव रहा है। हाल के वर्षों में चीन ने पनामा में भारी निवेश किया है और वहां के बंदरगाहों के प्रबंधन में चीनी कंपनियों की भूमिका बढ़ी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से अमेरिका की घेराबंदी करने की एक चाल है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ के तहत पश्चिमी गोलार्ध में बढ़ता प्रभाव अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि चीन पनामा नहर जैसी रणनीतिक जगह पर नियंत्रण पाता है, तो वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को बाधित कर सकता है। ट्रंप की यह टिप्पणी उनके उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें वे अमेरिका को फिर से दुनिया की एकमात्र महाशक्ति के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और खुले व्यापार मार्गों के समर्थक हैं। पनामा नहर में किसी भी प्रकार की अस्थिरता या एकाधिकार का सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और रसद (लॉजिस्टिक्स) की लागत पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका और यूरोप जाने वाले मालवाहक जहाजों के लिए यह मार्ग अत्यंत सुलभ है। यदि चीन इस पर अपना प्रभाव बढ़ाता है, तो इससे क्वाड (QUAD) देशों के हितों को भी चुनौती मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख चीन के साथ व्यापार युद्ध के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है। चीन ने फिलहाल इन आरोपों को खारिज किया है और इसे अपने सामान्य व्यापारिक विस्तार का हिस्सा बताया है। हालांकि, व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका पनामा सरकार के साथ नए समझौतों पर विचार कर रहा है ताकि वहां अमेरिकी हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। आने वाले समय में यह मुद्दा बीजिंग और वाशिंगटन के बीच तनाव का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।
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