राजनीति
ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर लगाई रोक: पाकिस्तान की अपील और ईरान के साथ कूटनीतिक बदलाव के बीच बड़ा फैसला
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 12:00 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा के लिए शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अचानक रोकने का निर्णय लिया है। यह कदम पाकिस्तान के अनुरोध और ईरान के साथ संभावित वार्ता के बीच आया है।
वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार देर रात एक बड़ा कूटनीतिक उलटफेर करते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) को तत्काल प्रभाव से रोकने की घोषणा की है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा और ईरान के प्रभाव को सीमित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह सैन्य अभियान अब ठंडे बस्ते में चला गया है। व्हाइट हाउस के इस फैसले ने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के रणनीतिकारों को चौंका दिया है।
इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण पाकिस्तान की ओर से की गई एक आधिकारिक अपील और ईरान के साथ चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत को माना जा रहा है। ट्रम्प प्रशासन के अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधानों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक प्रयास है। पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिका से अनुरोध किया था कि सैन्य दबाव बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक रास्तों का उपयोग किया जाए, क्योंकि किसी भी बड़े संघर्ष का सीधा असर दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे भारतीय प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा रसद (logistics) और वैश्विक व्यापार से जुड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। यहाँ तनाव कम होने का अर्थ है तेल की कीमतों में स्थिरता, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और जीवन यापन की लागत पर पड़ता है। साथ ही, भारत के लिए भी यह राहत की बात है क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाली भारत की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर है।
आलोचकों का मानना है कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकना ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा हो सकता है, जहाँ वे विदेशी सैन्य अभियानों पर खर्च कम करना चाहते हैं। हालांकि, रक्षा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस सुरक्षा मिशन के हटने से क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। पाकिस्तान की भूमिका इस पूरे मामले में एक मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आई है, जो इस्लामाबाद के वाशिंगटन के साथ बदलते रिश्तों की ओर संकेत करती है।
फिलहाल, पेंटागन ने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती के बजाय आर्थिक समझौतों और द्विपक्षीय बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस नरम रुख पर क्या प्रतिक्रिया देता है और वैश्विक बाजार इस अनिश्चितता को कैसे स्वीकार करता है।
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