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मानसून सत्र: विपक्षी हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित, नीट और अयोध्या जमीन विवाद पर संग्राम

ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 07:35 pm
मानसून सत्र: विपक्षी हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित, नीट और अयोध्या जमीन विवाद पर संग्राम

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने नीट विवाद और राम मंदिर भूमि सौदे में कथित अनियमितताओं को लेकर जोरदार नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

भारतीय संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को भारी हंगामे के साथ हुई। विपक्षी दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए सदन में नारेबाजी की, जिसके कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सत्र के पहले दिन जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी खेमे से शोर-शराबा शुरू हो गया, जिससे सदन में कामकाज सुचारू रूप से नहीं चल सका। कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के उन पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि दी जिनका हाल ही में निधन हुआ था। शोक संवेदना व्यक्त करने की प्रक्रिया पूरी होते ही विपक्ष के नेता और अन्य विपक्षी सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष की मुख्य मांग नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की थी। इसके अलावा, विपक्षी सदस्यों ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए दी गई भूमि के दान में कथित घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सरकार से जवाब मांगा। अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर वापस जाने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल सदन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और सदस्यों को जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने का अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने उनकी अपीलों को अनसुना कर दिया और 'न्याय दो' के नारों के साथ सदन के बीचों-बीच (वेल) आ गए। सदन में इस अराजक स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष के पास कार्यवाही स्थगित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। नीट विवाद इस समय भारत में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है, जिसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि कई प्रवासी परिवारों के बच्चे भारत में मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं और इस तरह की अनियमितताएं सिस्टम के प्रति उनके विश्वास को प्रभावित करती हैं। विपक्ष का तर्क है कि सरकार इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरतने में विफल रही है। सत्र के बाकी दिनों में भी इसी तरह के कड़े रुख की उम्मीद है, क्योंकि सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सूचीबद्ध किया है, जबकि विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का गवाह बनेगा, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने की गति प्रभावित हो सकती है। आगामी दिनों में देखना होगा कि क्या सदन में कोई सार्थक चर्चा संभव हो पाती है या विरोध का यह सिलसिला जारी रहता है।
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