राजनीति
ट्रम्प ने ईरान पर हमलों का बचाव किया; कहा- 'हमने तेहरान को परमाणु बम बनाने से रोका'
ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 06:31 pm
डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अपनी प्रशासन की नीतियों का बचाव करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक दिया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के प्रति अपनी प्रशासन की सख्त नीतियों का पुरजोर बचाव किया है। एक हालिया संबोधन में ट्रम्प ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान की गई सैन्य कार्रवाइयों, विशेष रूप से बी-2 (B-2) बॉम्बर ऑपरेशन्स ने ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से सफलतापूर्वक रोक दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान शुरू में एक परमाणु समझौते के लिए तैयार था, लेकिन बाद में वह अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया। ट्रम्प ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।"
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराने के फैसले को भी सही ठहराया। उन्होंने सुलेमानी को एक "ईविल जीनियस" (दुष्ट प्रतिभा) करार देते हुए कहा कि वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए एक बड़ा खतरा था। ट्रम्प के अनुसार, इस तरह की लक्षित कार्रवाइयों ने न केवल अमेरिका की शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों को कड़ा संदेश भी दिया।
पूर्व राष्ट्रपति ने खाड़ी क्षेत्र के अपने सहयोगियों - सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और कुवैत - की सुरक्षा के प्रति अमेरिकी भूमिका पर भी चर्चा की। हालांकि, उन्होंने एक बार फिर अपनी 'लेन-देन' वाली विदेश नीति (transactional foreign policy) को दोहराया। ट्रम्प का तर्क है कि ये देश बेहद समृद्ध हैं और अमेरिका उन्हें जो सुरक्षा और सैन्य संरक्षण प्रदान करता है, उसके बदले में इन देशों को वाशिंगटन को भुगतान करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा उन देशों की रक्षा के लिए क्यों खर्च किया जाना चाहिए जो स्वयं सक्षम हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए मध्य पूर्व की यह हलचल अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर करती है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय प्रवासियों के परिवार और व्यावसायिक संबंध खाड़ी देशों से जुड़े हुए हैं। यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में महंगाई बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प के ये बयान भविष्य की अमेरिकी विदेश नीति का संकेत हो सकते हैं, विशेष रूप से आगामी चुनावों के मद्देनजर। यदि अमेरिका अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं के लिए भुगतान की मांग करता है, तो इससे भारत-प्रशांत क्षेत्र और मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है। आईएनसी24 (ICN24) इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका प्रभाव न केवल वैश्विक कूटनीति पर, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक परिदृश्य पर भी पड़ता है।
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