लाइव
राजनीति
राजनीति

कुल प्रजनन दर (TFR) में गिरावट: दावे, चिंता और भविष्य की सच्चाई

ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 05:00 pm
कुल प्रजनन दर (TFR) में गिरावट: दावे, चिंता और भविष्य की सच्चाई

भारत की प्रजनन दर में आ रही निरंतर गिरावट ने जनसांख्यिकीय असंतुलन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सामाजिक और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करेगा।

भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) में पिछले कुछ दशकों में आई गिरावट ने नीति निर्माताओं और समाजशास्त्रियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय प्रजनन दर अब प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) यानी 2.1 से नीचे गिरकर 2.0 पर आ गई है। यह स्थिति न केवल भारत के भीतर, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह भविष्य के श्रम बल और पारिवारिक संरचना को सीधे प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीएफआर में इस गिरावट के पीछे बढ़ती शिक्षा, शहरीकरण और महिलाओं की कार्यबल में बढ़ती भागीदारी प्रमुख कारण हैं। हालांकि, इस गिरावट को अक्सर 'जनसंख्या नियंत्रण' की सफलता के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके साथ ही 'बूढ़ी होती आबादी' का संकट भी जुड़ा है। यदि प्रजनन दर इसी तरह गिरती रही, तो आने वाले दशकों में भारत के सामने भी वही चुनौतियां होंगी जो आज जापान या कई यूरोपीय देश झेल रहे हैं, यानी आश्रित बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और काम करने वाले युवाओं की कमी। राजनीतिक गलियारों में टीएफआर के आंकड़ों को लेकर अक्सर अलग-अलग दावे किए जाते हैं। कुछ वर्गों का मानना है कि जनसंख्या का यह असंतुलन भविष्य में चुनावी राजनीति और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) को प्रभावित कर सकता है। दक्षिण भारतीय राज्यों में प्रजनन दर उत्तर भारत की तुलना में काफी कम है, जिससे इन राज्यों को यह डर सता रहा है कि बेहतर जनसंख्या नियंत्रण के बावजूद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है। ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय समुदाय यहां सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रवासी समूहों में से एक है। भारत में गिरती प्रजनन दर का असर भविष्य में ऑस्ट्रेलिया की 'स्किल्ड माइग्रेशन' नीतियों पर भी पड़ सकता है। यदि भारत में ही युवाओं की कमी होने लगी, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं का प्रवास भी प्रभावित होगा। प्रवासी परिवारों के भीतर भी अब छोटे परिवारों का चलन बढ़ा है, जो जीवनशैली और आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाता है। अंततः, टीएफआर की सच्चाई केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह एक विकसित होते समाज की तस्वीर है। सरकार को अब ऐसी नीतियां बनाने की आवश्यकता है जो न केवल जनसंख्या को स्थिर रखें, बल्कि गिरती दर से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, जैसे कि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता बोझ और युवाओं के कौशल विकास, का भी समाधान कर सकें। टीएफआर में गिरावट चिंता का विषय जरूर है, लेकिन यह उचित नियोजन के साथ एक अवसर भी बन सकता है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

मूलांक 1 राशिफल 5 अगस्त: जल्दबाजी में लिए फैसले पड़ सकते हैं भारी, जानें कैसा रहेगा आपका दिन
राजनीति

मूलांक 1 राशिफल 5 अगस्त: जल्दबाजी में लिए फैसले पड़ सकते हैं भारी, जानें कैसा रहेगा आपका दिन

5 अगस्त का दिन मूलांक 1 वालों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सूर्य प्रधान इस अंक के जातकों को कार्यक्षेत्र और निजी जीवन में संयम बरतने की सलाह दी गई है।

5 अग॰ 2026, 08:37 am
बस्ती न्यूज़: नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने लिया कांवड़ यात्रा की तैयारियों का जायजा, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
राजनीति

बस्ती न्यूज़: नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने लिया कांवड़ यात्रा की तैयारियों का जायजा, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने बस्ती में कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों का निरीक्षण कर सफाई, रोशनी और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए हैं।

5 अग॰ 2026, 07:37 am
भ्रष्टाचार मामला: 52 किलो सोना कांड के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से मिली जमानत
राजनीति

भ्रष्टाचार मामला: 52 किलो सोना कांड के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से मिली जमानत

जबलपुर हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को 18 महीने बाद सशर्त जमानत दे दी है। शर्मा को 10 लाख रुपये के मुचलके पर रिहा किया गया है।

5 अग॰ 2026, 06:38 am