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भ्रष्टाचार मामला: 52 किलो सोना कांड के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से मिली जमानत
ICN24 Newsroom 5 अग॰ 2026, 06:38 am
जबलपुर हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को 18 महीने बाद सशर्त जमानत दे दी है। शर्मा को 10 लाख रुपये के मुचलके पर रिहा किया गया है।
मध्य प्रदेश के चर्चित भ्रष्टाचार मामले में जबलपुर हाईकोर्ट से पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को बड़ी राहत मिली है। आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, जो करीब 18 महीने से सलाखों के पीछे थे, उन्हें हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने शर्मा को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जमानत मिलने का तात्पर्य आरोपों से बरी होना नहीं है।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की अदालत ने सौरभ शर्मा की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने माना कि चूंकि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच एजेंसी द्वारा चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, इसलिए आरोपी को और अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि मामले में दस्तावेजों और गवाहों की संख्या काफी अधिक है, जिससे मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना कम है। कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को केवल लंबे ट्रायल के आधार पर अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
यह पूरा मामला फरवरी 2025 में उस समय सुर्खियों में आया था जब भोपाल के बाहरी इलाके मेंडोरी के जंगलों में एक लावारिस कार से 52 किलो सोना और लगभग 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। लोकायुक्त पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में इस बेहिसाब संपत्ति के तार सौरभ शर्मा से जुड़े पाए गए थे। शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और भ्रष्टाचार के माध्यम से करोड़ों की काली कमाई की।
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सौरभ शर्मा की जमानत का कड़ा विरोध किया था। जांच एजेंसी की दलील थी कि आरोपी एक प्रभावशाली व्यक्ति है और जेल से बाहर आने पर वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को डरा-धमका सकता है। हालांकि, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शर्मा पहले ही 18 महीने की सजा काट चुके हैं और संबंधित धाराओं में अधिकतम सजा सात वर्ष है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।
जमानत की शर्तों के तहत सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट की हर सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा। साथ ही, उन्हें अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ सकता है और वे किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।
सौरभ शर्मा का करियर विवादों से भरा रहा है। वीआरएस (VRS) लेने से पहले अपने सात साल के कार्यकाल में उनका 12 बार तबादला हुआ था। उन्होंने परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ काम किया था, जिससे इस मामले के तार और भी गहरे होने की आशंका जताई जा रही थी। पूर्व में उनकी जमानत याचिकाएं दो बार खारिज हो चुकी थीं, और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत न देते हुए दोबारा निचली अदालत में आवेदन करने को कहा था।
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