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तिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद: हिंदू मुन्नानी ने शुरू किया पोस्टकार्ड अभियान, TVK सरकार से कोर्ट के आदेशों का पालन करने की मांग
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 09:31 pm

हिंदू मुन्नानी ने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिकेय दीपम जलाने की अनुमति देने के लिए तमिलनाडु की TVK सरकार के खिलाफ पोस्टकार्ड और हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है।
तमिलनाडु में तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिकेय दीपम जलाने का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। हिंदू मुन्नानी संगठन ने राज्य की जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) सरकार के खिलाफ एक व्यापक हस्ताक्षर और पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया है। संगठन की मांग है कि सरकार मद्रास उच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करे और भक्तों को पहाड़ी की चोटी पर पारंपरिक दीप जलाने की अनुमति दे।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब TVK सरकार के मंत्रियों ने संकेत दिया कि वे पहाड़ी पर मौजूदा 'यथास्थिति' (status quo) को बनाए रखेंगे। हाल ही में मदुरै में पत्रकारों से बात करते हुए, तमिलनाडु के कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार उस स्थिति को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है जो पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार सांप्रदायिक ताकतों को राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे का फायदा उठाने की अनुमति नहीं देगी।
हिंदू मुन्नानी ने इस रुख का कड़ा विरोध करते हुए वेल्लोर और अन्य जिलों में पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया है। संगठन का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा का मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक आदेशों के पालन का भी सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार अदालती फैसलों की अनदेखी करती है, तो उसे भविष्य के चुनावों में जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।
भाजपा ने भी इस मामले में सरकार की तीखी आलोचना की है। तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने मंत्री के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि सरकार को अदालत के आदेशों का अध्ययन करना चाहिए। वहीं, भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने आरोप लगाया कि TVK सरकार हिंदुओं की भावनाओं की अनदेखी कर रही है, ठीक उसी तरह जैसे पिछली डीएमके सरकार ने किया था।
दूसरी ओर, सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु और वामपंथी दलों (सीपीएम और सीपीआई) ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सरकार को 'धार्मिक कट्टरपंथी तत्वों' के दबाव में नहीं आना चाहिए। इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पर लगाए गए जुर्माने को 50,000 रुपये से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि तिरुपरनकुंद्रम भगवान मुरुगन के छह पवित्र निवासों में से एक है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले तमिल प्रवासियों के बीच इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है, जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से मजबूती से जुड़े हुए हैं।
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