लाइव
विज्ञापन
Demo Interstitial - Migration Consultancy
ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग

हिंसक किरदारों की गहराई में उतरने से बढ़ा कलाकारों पर मानसिक दबाव: क्या सिनेमा का बदलता स्वरूप जोखिम भरा है?

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:22 am
हिंसक किरदारों की गहराई में उतरने से बढ़ा कलाकारों पर मानसिक दबाव: क्या सिनेमा का बदलता स्वरूप जोखिम भरा है?

भारतीय सिनेमा में हिंसक और जटिल किरदारों को निभाने की बढ़ती होड़ ने कलाकारों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके निजी जीवन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

भारतीय सिनेमा का परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदला है। अब कलाकार केवल 'चॉकलेट बॉय' या पारंपरिक नायक की भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहते। आज का दौर यथार्थवादी और जटिल किरदारों का है, जहां हिंसा और मानसिक द्वंद्व को प्रमुखता दी जा रही है। हालांकि, इन किरदारों की गहराई में उतरना कलाकारों के लिए केवल पेशेवर उपलब्धि नहीं, बल्कि एक मानसिक चुनौती भी बनता जा रहा है। हाल के दिनों में कई बड़े सितारों ने खुलकर स्वीकार किया है कि एक हिंसक या नकारात्मक किरदार को निभाने के बाद उससे बाहर निकलना उनके लिए कितना कठिन रहा है। 'मेथड एक्टिंग' की प्रक्रिया, जिसमें कलाकार खुद को पूरी तरह से किरदार की परिस्थितियों में ढाल लेता है, अक्सर उन्हें अवसाद या मानसिक थकान की ओर ले जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई अभिनेता महीनों तक हिंसा, क्रोध और नकारात्मक भावनाओं का अभ्यास करता है, तो इसका असर उनके अवचेतन मन पर पड़ता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे ऑस्ट्रेलियाई शहरों में रहने वाले भारतीय प्रवासी, जो बॉलीवुड और क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा के बड़े प्रशंसक हैं, अब सिनेमा के इस बदलते और अधिक 'डार्क' स्वरूप पर चर्चा कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई फिल्म समारोहों में प्रदर्शित होने वाली कई भारतीय फिल्में अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के गहरे और कभी-कभी डरावने पहलुओं को भी दिखाती हैं। हाल ही में 'एनिमल' और 'किल' जैसी फिल्मों के संदर्भ में यह चर्चा और तेज हुई है। अभिनेताओं का कहना है कि शूटिंग के दौरान वे अपने परिवार से दूर रहते हैं और खुद को एक एकांत कमरे में बंद कर लेते हैं ताकि उस हिंसक मानसिकता को अपना सकें। लेकिन जब कैमरा बंद होता है, तो वह गुस्सा और वह नकारात्मकता तुरंत खत्म नहीं होती। कई मामलों में अभिनेताओं को फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद पेशेवर थेरेपी या लंबी छुट्टियों का सहारा लेना पड़ता है ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें। सिनेमा के जानकारों का कहना है कि यह प्रवृत्ति भारतीय दर्शकों की बदलती पसंद का परिणाम है। दर्शक अब पर्दे पर कच्ची और बेबाक कहानियाँ देखना चाहते हैं। लेकिन क्या इस 'कला' की कीमत किसी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य होना चाहिए? ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय भारतीय फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि फिल्म उद्योग को अब कलाकारों के मानसिक कल्याण के लिए 'इंटिमेसी कोच' की तरह 'मेंटल हेल्थ एडवाइजर्स' की नियुक्ति पर विचार करना चाहिए। मनोरंजन की इस चमक-धमक के पीछे छिपे अंधेरे को पहचानना अब समय की मांग है, ताकि कला और कलाकार दोनों सुरक्षित रह सकें।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

सिर्फ फोटो नहीं, मेलोनी की इस बात पर गुस्साए ट्रंप; निकाली ईरान से युद्ध में इटली का साथ ना मिलने की झल्लाहट
ब्रेकिंगब्रेकिंग

सिर्फ फोटो नहीं, मेलोनी की इस बात पर गुस्साए ट्रंप; निकाली ईरान से युद्ध में इटली का साथ ना मिलने की झल्लाहट

डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उन्होंने G7 शिखर सम्मेलन में उनके साथ फोटो खिंचवाने की गुहार लगाई थी और ईरान के मुद्दे पर साथ नहीं दिया।

21 जून 2026, 01:55 am
लखनऊ में विवाहिता का शव फंदे से लटका मिला: पति ने परिचित पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच शुरू
ब्रेकिंगब्रेकिंग

लखनऊ में विवाहिता का शव फंदे से लटका मिला: पति ने परिचित पर लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच शुरू

लखनऊ के कृष्णानगर में एक 22 वर्षीय महिला का शव घर में फंदे से लटका मिला। पति ने अपने एक परिचित पर हत्या की आशंका जताई है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

21 जून 2026, 01:40 am
NEET UG 2026 री-एग्जाम एडमिट कार्ड जारी: यहाँ जानें ऑनलाइन डाउनलोड करने का पूरा तरीका
ब्रेकिंगब्रेकिंग

NEET UG 2026 री-एग्जाम एडमिट कार्ड जारी: यहाँ जानें ऑनलाइन डाउनलोड करने का पूरा तरीका

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 पुन: परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in से इसे डाउनलोड कर सकते हैं।

21 जून 2026, 01:25 am
Original text
Rate this translation
Your feedback will be used to help improve Google Translate