ऑस्ट्रेलिया
अल्बनीज़ और एंगस के लिए बड़ी चुनौती: पॉलीन हैनसन की राजनीति से कैसे निपटें?
ICN24 Newsroom 20 जुल॰ 2026, 10:34 pm

ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में पॉलीन हैनसन एक चुनौतीपूर्ण धुरी बनी हुई हैं। प्रमुख दलों के लिए उन्हें सीधे निशाने पर लेना उनके समर्थक आधार को और मजबूत कर सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक सवाल गूंज रहा है जिसका जवाब न तो प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीज़ (Albo) के पास स्पष्ट है और न ही विपक्षी गठबंधन के वरिष्ठ नेता एंगस टेलर (Angus) के पास। सवाल यह है कि सीनेटर पॉलीन हैनसन और उनकी पार्टी 'वन नेशन' का क्या किया जाए? जैसे-जैसे देश अगले संघीय चुनावों की ओर बढ़ रहा है, मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के लिए हैनसन एक ऐसी 'दोधारी तलवार' बन गई हैं, जिसे छूना और छोड़ना दोनों ही जोखिम भरा है।
पॉलीन हैनसन पिछले तीन दशकों से ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक विवादास्पद लेकिन स्थिर उपस्थिति रही हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, उनका नाम अक्सर आव्रजन (immigration) और बहुसंस्कृतिवाद पर सख्त और कभी-कभी विभाजनकारी टिप्पणियों से जुड़ा होता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन पर सीधा हमला करना अक्सर उल्टा पड़ जाता है। जब भी 'कैनबरा के अभिजात वर्ग' या मुख्यधारा की मीडिया उन पर निशाना साधती है, तो वह इसे अपने पक्ष में मोड़ लेती हैं। वह खुद को एक ऐसे 'बाहरी व्यक्ति' (outsider) के रूप में पेश करती हैं, जिसे व्यवस्था चुप कराना चाहती है, जिससे उनके समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता और बढ़ जाती है।
लेबर पार्टी और एंथनी अल्बनीज़ के लिए चुनौती यह है कि वे हैनसन की नीतियों का विरोध तो करना चाहते हैं, लेकिन वे उन्हें जरूरत से ज्यादा 'ऑक्सीजन' या प्रचार नहीं देना चाहते। यदि सरकार उन पर बहुत कड़ा प्रहार करती है, तो इससे उन मतदाताओं में नाराजगी पैदा हो सकती है जो महसूस करते हैं कि मुख्यधारा के दल उनकी चिंताओं को नहीं सुन रहे हैं। विशेष रूप से क्षेत्रीय क्षेत्रों में, जहाँ लोग आर्थिक असुरक्षा महसूस करते हैं, वहां हैनसन का प्रभाव गहरा है।
दूसरी ओर, लिबरल पार्टी के एंगस टेलर और पीटर डटन के लिए समीकरण और भी जटिल हैं। गठबंधन को अक्सर चुनावों में जीत हासिल करने के लिए 'वन नेशन' के 'प्रेफरेंस वोट' (वरीयता वोट) की आवश्यकता होती है। लेकिन मेलबर्न और सिडनी के उन उपनगरों में, जहाँ भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई और अन्य प्रवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां पॉलीन हैनसन से बहुत अधिक नजदीकी गठबंधन के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। प्रवासी समुदाय ऐसी किसी भी पार्टी को संदेह की दृष्टि से देखता है जो हैनसन जैसी कट्टरपंथी विचारधारा के साथ समझौता करती दिखे।
अंततः, ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में पॉलीन हैनसन की समस्या का कोई आसान समाधान नहीं है। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि उन्हें हाशिए पर धकेलने का सबसे प्रभावी तरीका उनके खिलाफ बयानबाजी नहीं, बल्कि उन बुनियादी मुद्दों (जैसे महंगाई और आवास संकट) को हल करना है, जो लोगों को उनके जैसे 'लोकलुभावन' नेताओं की ओर धकेलते हैं। भारतीय समुदाय के लिए, यह राजनीतिक खींचतान केवल सत्ता का खेल नहीं है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया के भविष्य के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
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