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राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी की कड़ी नजर: 15.15 लाख करोड़ रुपये के सवाल ने भारतीय बाजार में मचाई हलचल

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 08:30 pm
राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी की कड़ी नजर: 15.15 लाख करोड़ रुपये के सवाल ने भारतीय बाजार में मचाई हलचल

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने दिग्गज आभूषण निर्यातक राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय विसंगतियों को लेकर जांच तेज कर दी है।

भारत के पूंजी बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने देश की सबसे बड़ी स्वर्ण निर्यातक कंपनियों में से एक, राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ व्यापक जांच शुरू की। यह मामला लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर और उससे जुड़े वित्तीय आंकड़ों में विसंगतियों से संबंधित है। सेबी की इस कार्रवाई ने न केवल घरेलू निवेशकों बल्कि ऑस्ट्रेलिया सहित विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय निवेशकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है, जो भारतीय इक्विटी बाजार में सक्रिय रूप से निवेश करते हैं। जांच का मुख्य केंद्र कंपनी द्वारा राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने (Revenue Misstatement) और अपनी सहायक कंपनियों (Subsidiaries) के वित्तीय विवरणों का खुलासा न करने के आरोप हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी के बही-खातों में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक लेन-देन के बीच भारी अंतर पाया गया है। नियामक संस्था अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या कंपनी ने जानबूझकर निवेशकों को गुमराह करने के लिए अपने टर्नओवर के आंकड़ों में हेरफेर किया था। कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मोर्चे पर भी राजेश एक्सपोर्ट्स गंभीर सवालों के घेरे में है। बोर्ड के निर्णयों में पारदर्शिता की कमी और ऑडिट प्रक्रियाओं पर उठते सवालों ने निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब इतनी बड़ी कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर पूरे सेक्टर के सेंटीमेंट पर पड़ता है। पिछले कुछ सत्रों में कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे छोटे निवेशकों की पूंजी को बड़ा नुकसान हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर भारतीय शेयर बाजार में अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा निवेश करते हैं, यह घटना एक चेतावनी की तरह है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय एनआरआई पोर्टफोलियो मैनेजरों ने अपने क्लाइंट्स को सलाह दी है कि वे ऐसी कंपनियों के प्रति सतर्क रहें जहां कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानक स्पष्ट नहीं हैं। यह मामला भारत के विनियामक ढांचे की मजबूती का भी परीक्षण करेगा। फिलहाल, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन बाजार को अब सेबी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक हो सकता है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारतीय बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी कितनी आवश्यक है।
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