राजनीति
INDIA गठबंधन की बैठक से पहले खींचतान: सीपीएम ने कांग्रेस से केरल 'डील' वाले बयान पर स्पष्टीकरण मांगा
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 08:00 am
विपक्षी गठबंधन की बैठक से पहले वामपंथी दल ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर केरल चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
नई दिल्ली: विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक से पहले आंतरिक कलह उभरकर सामने आई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की है कि वह केरल विधानसभा चुनावों के दौरान वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) और भाजपा के बीच कथित 'गुप्त समझौते' वाले बयानों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिशें की जा रही हैं।
सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक तीखा पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा केरल में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उन बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें वामदलों और भाजपा के बीच साठगांठ का आरोप लगाया गया था। सीपीएम का तर्क है कि इस तरह के आधारहीन आरोप न केवल गठबंधन की भावना के खिलाफ हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित करते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से केरल के प्रवासियों के लिए यह खबर काफी अहमियत रखती है। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले मलयाली समुदाय के बीच केरल की राजनीति पर गहन चर्चा होती है। वहां के प्रवासियों के लिए राज्य की राजनीति केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि उनकी पहचान और वैचारिक जुड़ाव का हिस्सा है। गठबंधन में आई यह दरार विदेशों में बैठे समर्थकों के बीच भी चिंता का विषय बनी हुई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीपीएम का यह कड़ा रुख गठबंधन के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने की एक कोशिश है। केरल में पारंपरिक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ और सीपीएम के नेतृत्व वाला एलडीएफ मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होने के बावजूद, राज्य स्तर की प्रतिद्वंद्विता गठबंधन की राह में रोड़ा बन रही है।
आगामी बैठक में गठबंधन की भविष्य की रणनीति और सीट-शेयरिंग जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा होनी है। यदि कांग्रेस और सीपीएम के बीच यह गतिरोध दूर नहीं होता, तो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। खड़गे को लिखे पत्र में एम.ए. बेबी ने स्पष्ट किया है कि सहयोग के लिए आपसी सम्मान और विश्वास अनिवार्य है, जिसे चुनावी लाभ के लिए दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
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