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तेलंगाना सरकार ने हमाली शुल्कों में की वृद्धि, श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की घोषणा

ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 06:00 am
तेलंगाना सरकार ने हमाली शुल्कों में की वृद्धि, श्रमिकों के लिए कल्याणकारी उपायों की घोषणा

तेलंगाना सरकार ने धान खरीद में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए हमाली श्रमिकों के शुल्कों में वृद्धि की है और उनके कल्याण के लिए नए उपायों को मंजूरी दी है।

तेलंगाना सरकार ने राज्य के हमाली (लोडिंग और अनलोडिंग) श्रमिकों के लिए एक बड़े राहत पैकेज की घोषणा की है। नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने हमाली शुल्कों में बढ़ोतरी करने के साथ-साथ श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभों को बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय हमाली यूनियनों और सरकार के बीच पिछले कई महीनों से चल रही लंबी चर्चाओं के बाद लिया गया है। इस समझौते की पृष्ठभूमि हाल ही में संपन्न हुए धान खरीद सीजन (Paddy Procurement Season) से जुड़ी है। इस दौरान लॉजिस्टिक और श्रम संबंधी कई चुनौतियां सामने आई थीं, जिससे अनाज के उठाव में देरी हो रही थी। श्रमिकों ने बढ़ती महंगाई और काम की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए पारिश्रमिक में वृद्धि की मांग की थी। सरकार की इस पहल से अब राज्य के हजारों हमाली श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इसके अतिरिक्त, सरकार श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी काम कर रही है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन मांगों को प्राथमिकता दी ताकि भविष्य में अनाज की खरीद और वितरण में कोई बाधा न आए। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और कृषि क्षेत्र से जुड़े श्रम बल को न्याय दिलाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे तेलंगाना मूल के लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में एक बड़ा भारतीय समुदाय कृषि और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के व्यवसायों से जुड़ा हुआ है। तेलंगाना में हो रहे ये सुधार न केवल वहां के श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे, बल्कि राज्य की कृषि निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक दक्षता को भी बढ़ावा देंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एनआरआई (NRI), जो अक्सर अपने पैतृक गांवों में कृषि निवेश से जुड़े रहते हैं, इस फैसले को ग्रामीण बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं। विपक्ष और श्रमिक संगठनों ने हालांकि इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने समयबद्ध कार्यान्वयन की मांग भी की है। आने वाले समय में, यह देखा जाना बाकी है कि इन बड़े हुए शुल्कों का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है या सरकार इसे सब्सिडी के माध्यम से वहन करती है। फिलहाल, यह समझौता राज्य के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
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