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तेलंगाना: 73 लाख मतदाताओं के नाम हटने पर कांग्रेस मुखर, महेश कुमार गौड़ ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल

ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 04:39 am
तेलंगाना: 73 लाख मतदाताओं के नाम हटने पर कांग्रेस मुखर, महेश कुमार गौड़ ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल

तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने मतदाता सूची से 73 लाख नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है और पारदर्शिता की मांग की है।

हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीति में एक बार फिर चुनावी सूचियों को लेकर विवाद गहरा गया है। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के नवनियुक्त अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। मामला राज्य की मतदाता सूची से करीब 73 लाख नामों को हटाए जाने से जुड़ा है, जिसे कांग्रेस ने लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया है। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए महेश कुमार गौड़ ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना संदेह पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और कई पात्र मतदाताओं को बिना उचित सूचना या सत्यापन के सूची से बाहर कर दिया गया है। गौड़ ने मांग की है कि चुनाव आयोग इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करे और यह सुनिश्चित करे कि किसी भी वास्तविक मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित न किया जाए। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का असर सीधे तौर पर आगामी चुनावों के परिणामों पर पड़ सकता है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम कुछ विशेष क्षेत्रों में जानबूझकर उठाया गया हो सकता है। महेश कुमार गौड़ ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक बार फिर इन सूचियों का मिलान करे ताकि गलतियों को सुधारा जा सके। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर तेलंगाना मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले हजारों तेलुगु भाषी लोग अभी भी भारत की राजनीति में सक्रिय रुचि रखते हैं और कई लोग चुनाव के समय वोट डालने के लिए भारत भी जाते हैं। मतदाता सूची में इस तरह के बड़े बदलावों से उन एनआरआई (अनिवासी भारतीयों) के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो अपने मताधिकार का प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तेलंगाना में मतदाता सूची का शुद्धिकरण हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान भी फर्जी वोटों और दोहरी प्रविष्टियों को लेकर काफी विवाद हुआ था। हालांकि, 73 लाख का आंकड़ा इतना बड़ा है कि इसने न केवल कांग्रेस, बल्कि अन्य सामाजिक संगठनों को भी चौकन्ना कर दिया है। कांग्रेस अब इस मुद्दे को जमीनी स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है ताकि जनता को अपने वोट की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके। फिलहाल, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के नियमित अभ्यास का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह विवाद तेलंगाना की राजनीति में और गरमाने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे पर कानूनी विकल्प भी तलाश रही है।
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