बिज़नेस
टैरिफ और 50 अरब डॉलर का व्यापार असंतुलन: भारत-अमेरिका व्यापार सौदे में अमेरिकी सीनेटर ने जताई चिंता
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 01:57 pm

अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल ने भारत के साथ व्यापार वार्ता में 50 अरब डॉलर के घाटे और उच्च टैरिफ को बड़ी बाधा बताया है, जिससे द्विपक्षीय समझौते में देरी हो रही है।
वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें एक बार फिर बाधाओं के घेरे में हैं। अमेरिकी सीनेटर रोजर मार्शल ने भारत के साथ व्यापार वार्ता में बढ़ती चुनौतियों को लेकर चिंता व्यक्त की है, जिसमें विशेष रूप से 50 अरब डॉलर के बढ़ते व्यापार असंतुलन और भारत द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ को मुख्य कारण बताया गया है। सीनेटर मार्शल का कहना है कि जब तक भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार नहीं खोलता और व्यापार की शर्तों को अधिक 'पारस्परिक' (reciprocal) नहीं बनाता, तब तक एक ठोस समझौता मुश्किल नजर आता है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक रूप से मजबूत हुए हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर अभी भी कई पेच फंसे हुए हैं। सीनेटर मार्शल ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की जरूरत है। वाशिंगटन लंबे समय से डेयरी उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और कृषि उत्पादों पर भारत की उच्च सीमा शुल्क दरों (tariffs) की आलोचना करता रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी नीतियों में बदलाव करे ताकि अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में समान अवसर मिल सकें।
यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और व्यवसायों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया 'क्वाड' (QUAD) के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जहां एक ओर भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 'एआई-ईसीटीए' (AI-ECTA) के माध्यम से अपने व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है, वहीं अमेरिका के साथ चल रही यह खींचतान वैश्विक व्यापारिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय उद्यमी, जो अक्सर इन तीनों देशों के बीच त्रिकोणीय व्यापार करते हैं, उनके लिए इन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ विवाद चिंता का विषय हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं (जैसे 'मेक इन इंडिया') की रक्षा के लिए टैरिफ को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है। दूसरी ओर, जो बिडेन प्रशासन पर घरेलू स्तर पर यह दबाव है कि वे अमेरिकी श्रमिकों और किसानों के हितों की रक्षा करें। सीनेटर मार्शल की टिप्पणियां इसी आंतरिक दबाव का परिणाम मानी जा रही हैं। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी आर्थिक संप्रभुता को बनाए रखते हुए अमेरिका जैसे बड़े साझेदार के साथ संतुलन कैसे बनाए।
फिलहाल, दोनों देशों के वाणिज्य प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर हैं, लेकिन सीनेटरों की ओर से उठ रहे ये स्वर संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में बातचीत और कठिन हो सकती है। यदि व्यापार वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल भारत और अमेरिका के लिए, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए भी फायदेमंद होगा, जो इस क्षेत्र में एक स्थिर और पारदर्शी व्यापार तंत्र की उम्मीद कर रहे हैं।
संबंधित ख़बरें
business
राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी का बड़ा खुलासा: 7.7 लाख करोड़ का टर्नओवर, लेकिन MD की सैलरी मात्र 17,000 रुपये
प्रवर्तन निदेशालय ने राजेश एक्सपोर्ट्स के वित्तीय दावों में भारी विसंगतियों का खुलासा किया है, जिसमें अधिकारियों के मामूली वेतन और अफ्रीकी निवेश पर सवाल उठाए गए हैं।
24 जून 2026, 04:12 pm
business
स्विगी इंस्टामार्ट में बड़ा फेरबदल: COO अंकित जैन और CBO हरि कुमार ने दिया इस्तीफा
क्विक कॉमर्स क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच स्विगी इंस्टामार्ट के दो बड़े अधिकारियों ने पद छोड़ा, IPO से पहले कंपनी के नेतृत्व में बड़ा बदलाव।
24 जून 2026, 03:56 pm

business
फेडेक्स के मुनाफे में बढ़त, लेकिन महंगाई और व्यापारिक अस्थिरता ने बढ़ाई चिंता; शेयरों में आई गिरावट
फेडेक्स ने उम्मीद से बेहतर मुनाफे की घोषणा की है, लेकिन कंपनी ने बढ़ती लागत और व्यापारिक चुनौतियों के प्रति आगाह किया है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
24 जून 2026, 03:42 pm


