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स्विट्जरलैंड में जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए जनमत संग्रह: क्या 1 करोड़ पर लगेगी लक्ष्मण रेखा?
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 06:01 am

स्विट्जरलैंड में बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए रविवार को एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह होने जा रहा है, जिसमें जनसंख्या की सीमा 1 करोड़ निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
यूरोप के खूबसूरत देश स्विट्जरलैंड में एक ऐसा बदलाव होने जा रहा है जिसका असर दुनिया भर की आव्रजन नीतियों पर पड़ सकता है। रविवार को स्विस नागरिक एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह (Referendum) में हिस्सा लेंगे, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या देश की जनसंख्या पर 1 करोड़ की अधिकतम सीमा (कैप) लगा दी जानी चाहिए। दक्षिणपंथी स्विस पीपल्स पार्टी (SVP) द्वारा समर्थित इस प्रस्ताव ने देश में आव्रजन और राष्ट्रीय संसाधनों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि स्विट्जरलैंड की सीमित भौगोलिक स्थिति और बुनियादी ढांचा अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का बोझ नहीं उठा सकता। वर्तमान में स्विट्जरलैंड की जनसंख्या लगभग 90 लाख के करीब है। प्रस्तावक चाहते हैं कि यदि जनसंख्या 95 लाख के आंकड़े को पार करती है, तो सरकार को शरणार्थियों के प्रवेश और अन्य वीजा श्रेणियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने चाहिए। यदि जनसंख्या 1 करोड़ तक पहुंच जाती है, तो देश को किसी भी नए विदेशी निवासी को अनुमति देने से पूरी तरह मना कर देना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था बल्कि वहां रहने वाले विदेशी समुदायों को भी प्रभावित करेगा। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड दोनों ही विकसित राष्ट्र हैं जो उच्च गुणवत्ता वाली जीवन शैली और कुशल प्रवासियों पर निर्भरता के लिए जाने जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी अक्सर 'बिग ऑस्ट्रेलिया' बनाम 'स्मॉल ऑस्ट्रेलिया' की बहस होती रहती है, जहां बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव के कारण आव्रजन पर लगाम लगाने की मांग उठती है।
विपक्ष और व्यापारिक संगठनों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि स्विस अर्थव्यवस्था पूरी तरह से विदेशी श्रम पर टिकी है। स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और आईटी जैसे क्षेत्रों में पहले से ही कर्मियों की भारी कमी है। यदि जनसंख्या पर कड़ा अंकुश लगाया गया, तो देश की आर्थिक विकास दर रुक जाएगी और यूरोपीय संघ के साथ स्विट्जरलैंड के संबंधों में भी खटास आ सकती है, क्योंकि यह 'फ्री मूवमेंट' के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
भारतीय प्रवासियों के लिए यह एक चेतावनी भरा संकेत है कि विकसित देशों में अब प्रवासन नीतियों को लेकर राष्ट्रवाद और संरक्षणवाद की भावना प्रबल हो रही है। रविवार के मतदान के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या स्विट्जरलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बनेगा जो कानूनन अपनी आबादी का कोटा तय करेगा, या वह अपनी पारंपरिक उदारवादी छवि को बनाए रखेगा।
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