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थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, करूर पीड़ितों को सरकारी नौकरी का फैसला बरकरार
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 04:37 am
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने तमिलनाडु सरकार द्वारा करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के निर्णय को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस कानूनी मोड़ को राजनीतिक गलियारों में 'थलपति' विजय और वर्तमान प्रशासन के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सामाजिक कल्याण की इस पहल पर विपक्षी दलों और कानूनी अड़चनों के कारण सवाल उठाए जा रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह घटना करूर जिले में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जिसमें मची भगदड़ के कारण 41 लोगों की जान चली गई थी। इस त्रासदी के बाद, राज्य सरकार ने मानवीय आधार पर मृतकों के आश्रितों को सरकारी विभागों में नियुक्त करने का निर्णय लिया था। हालांकि, मद्रास उच्च न्यायालय ने इस फैसले को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इस तरह की नियुक्तियां स्थापित भर्ती नियमों और समानता के अधिकार का उल्लंघन कर सकती हैं। हाई कोर्ट के इस रुख ने उन 41 परिवारों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया था जो पहले ही अपनी आजीविका खो चुके थे।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि ये नियुक्तियां असाधारण परिस्थितियों में की गई थीं और इनका उद्देश्य पीड़ितों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करना था। शीर्ष अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए नोटिस जारी किया और हाई कोर्ट के आदेश को अगले निर्देश तक स्थगित कर दिया। अदालत के इस फैसले का ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले तमिल प्रवासियों और भारतीय समुदाय के बीच भी व्यापक स्वागत हुआ है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे दक्षिण भारतीय समुदाय के लोग अक्सर तमिलनाडु की राजनीति और सामाजिक न्याय की नीतियों पर करीब से नजर रखते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल कानूनी जीत है, बल्कि यह सरकार की जन-केंद्रित छवि को भी मजबूत करता है। थलपति विजय, जो अब सक्रिय राजनीति में कदम रख चुके हैं, के समर्थकों के लिए भी यह एक सकारात्मक खबर है क्योंकि वे लंबे समय से इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से अब उन 41 परिवारों की नौकरी सुरक्षित होने की उम्मीद जगी है, जो पिछले कई महीनों से कानूनी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे।
आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट इस मामले की विस्तृत समीक्षा करेगा, लेकिन वर्तमान में दी गई यह राहत राज्य के प्रशासनिक मनोबल को बढ़ाने वाली है। करूर की उस दुखद घटना ने न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था, और अब न्यायपालिका के इस उदार रुख से पीड़ित परिवारों को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। ICN24 इस मामले के हर अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय तक सटीक जानकारी पहुंचती रहे।
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