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नीट परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: क्या अब बदल जाएगी पूरी व्यवस्था?

ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 11:37 pm
नीट परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: क्या अब बदल जाएगी पूरी व्यवस्था?

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी परीक्षा में सुधार के लिए केंद्र को विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशें लागू करने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) की शुचिता और पारदर्शिता को बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिया है कि वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाने के लिए गठित विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों पर तेजी से अमल करें। इस निर्देश का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के दौरान होने वाली धांधलियों को रोकना और छात्रों के विश्वास को पुनर्जीवित करना है। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक खामी भविष्य के डॉक्टरों की गुणवत्ता और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। कोर्ट ने विशेष रूप से पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति और नंदन नीलेकणी समिति की सिफारिशों का उल्लेख किया। इन समितियों को डेटा सुरक्षा बढ़ाने, तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और परीक्षा केंद्रों के आवंटन की प्रक्रिया को त्रुटिहीन बनाने का कार्य सौंपा गया है। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वर्तमान सुरक्षा उपायों का बचाव करते हुए कहा कि तंत्र काफी मजबूत है, लेकिन सरकार सुधारों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्रों और उन्नत डिजिटल निगरानी जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है। राधाकृष्णन समिति का गठन हाल ही में हुए पेपर लीक के विवाद के बाद किया गया था, जिसका उद्देश्य एनटीए के कामकाज में पारदर्शिता लाना है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवार अपने बच्चों को चिकित्सा शिक्षा (MBBS) के लिए भारत भेजते हैं, और इसके लिए नीट परीक्षा अनिवार्य है। ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सा सीटों के लिए अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और उच्च लागत के कारण, 'प्रवासी भारतीय' (NRI) और 'ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया' (OCI) छात्रों के लिए भारत एक प्रमुख केंद्र रहा है। परीक्षा प्रणाली में इस तरह के विवादों ने उन अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निवेश कर रहे हैं। सुधारों के इस निर्देश से विदेशी भारतीय छात्रों को भी एक समान और सुरक्षित अवसर मिलने की उम्मीद जगी है। आने वाले हफ्तों में, केंद्र सरकार को इन सुधारों के कार्यान्वयन पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नई प्रणाली परीक्षा के दिन होने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों का समाधान कर पाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीलेकणी समिति के सुझावों के अनुसार 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और सुरक्षित डेटा प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है, तो लीक की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। आईसीन24 (ICN24) इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा ताकि आप तक पल-पल की अपडेट पहुंचती रहे।
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