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150 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है 'सुपर अल-नीनो', दुनिया भर में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 03:37 pm
150 साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है 'सुपर अल-नीनो', दुनिया भर में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल 'सुपर अल-नीनो' 150 वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ सकता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत समेत दुनिया भर में भीषण गर्मी का संकट मंडरा रहा है।

दुनिया भर के जलवायु वैज्ञानिक एक बार फिर 'सुपर अल-नीनो' की सक्रियता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। नवीनतम मौसम मॉडल्स और वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल का अल-नीनो पिछले 150 वर्षों में सबसे अधिक शक्तिशाली साबित हो सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो वैश्विक औसत तापमान में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा सकती है, जिससे गर्मी के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होने की आशंका है। अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के गर्म होने से उत्पन्न होती है। जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो इसका असर वैश्विक वायुमंडल और मौसम प्रणालियों पर पड़ता है। 'सुपर अल-नीनो' की स्थिति तब बनती है जब यह तापमान वृद्धि अत्यधिक और लंबे समय तक बनी रहती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान डेटा 19वीं सदी के मध्य से अब तक के सबसे तीव्र अल-नीनो चक्र की ओर इशारा कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। ऐतिहासिक रूप से, अल-नीनो का ऑस्ट्रेलिया पर सीधा और गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसके कारण यहाँ भीषण गर्मी (Heatwaves) और सूखे की स्थिति पैदा होती है, जिससे जंगल की आग (Bushfires) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो (BOM) के अनुसार, अल-नीनो के प्रभाव से कम बारिश और औसत से अधिक तापमान रहने की संभावना रहती है, जो यहाँ की कृषि और जल संसाधनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। वहीं दूसरी ओर, भारत में इस घटना का सीधा प्रभाव मानसून पर पड़ता है। अल-नीनो के सक्रिय होने से भारतीय मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है, जिससे देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। भारत में कृषि क्षेत्र, जो काफी हद तक बारिश पर निर्भर है, को इससे भारी नुकसान हो सकता है। इसका सीधा असर खाद्य कीमतों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। प्रवासी भारतीयों के लिए यह दोहरी चिंता की बात है, क्योंकि उन्हें ऑस्ट्रेलिया की गर्मी के साथ-साथ भारत में अपने परिवारों और कृषि संबंधी हितों की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है। जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और सुपर अल-नीनो का यह घातक संयोजन दुनिया को एक 'अनचार्टर्ड टेरिटरी' या अनजान खतरे की ओर ले जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने पहले ही सरकारों को तैयार रहने की चेतावनी दी है। न केवल गर्मी, बल्कि अल-नीनो के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में अत्यधिक बाढ़ और समुद्री चक्रवातों की तीव्रता में भी वृद्धि देखी जा सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि समुदायों को जल संरक्षण और आग से बचाव की रणनीतियों पर अभी से काम शुरू कर देना चाहिए।
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