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दक्षिण कोरिया ने शोधकर्ताओं और कुशल श्रमिकों के लिए वीजा नियमों में दी ढील, भारतीय पेशेवरों के लिए खुले नए अवसर
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 02:30 am
दक्षिण कोरिया ने श्रम की कमी को दूर करने के लिए वीजा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे भारतीय STEM पेशेवरों और कुशल श्रमिकों के लिए वहां बसना और काम करना आसान होगा।
दक्षिण कोरिया सरकार ने देश में गहराते जनसांख्यिकीय संकट और कुशल श्रम की कमी से निपटने के लिए अपनी वीजा नीतियों में महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की है। इस नए कदम का उद्देश्य विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना है। यह बदलाव भारतीय पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से पश्चिमी देशों के अलावा अन्य तकनीकी रूप से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में अवसरों की तलाश कर रहे हैं।
कोरियाई न्याय मंत्रालय के अनुसार, नई नीति के तहत शोधकर्ताओं और उच्च-कुशल श्रमिकों के लिए पात्रता मानदंडों को सरल बनाया गया है। अब शोध संस्थानों में कार्यरत विदेशी विशेषज्ञों को मिलने वाले ई-3 (E-3) वीजा और पेशेवर रोजगार के लिए ई-7 (E-7) वीजा की श्रेणियों में अधिक लचीलापन लाया गया है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया में स्नातक करने वाले विदेशी छात्रों के लिए स्थानीय स्तर पर नौकरी खोजने और स्थायी निवास की ओर बढ़ने के मार्ग को भी सुगम बनाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विकास केवल भारत में रहने वाले युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत कई भारतीय शोधकर्ता और इंजीनियर अब दक्षिण कोरिया को एक आकर्षक विकल्प के रूप में देख सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ कोरियाई कंपनियां जैसे सैमसंग, हुंडई और एलजी विश्व स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और हाल के वर्षों में बढ़े व्यापारिक सहयोग ने भी इस प्रक्रिया को गति दी है।
दक्षिण कोरिया वर्तमान में दुनिया की सबसे कम प्रजनन दरों में से एक का सामना कर रहा है, जिसके कारण वहां की कार्यबल आबादी तेजी से घट रही है। अपनी औद्योगिक बढ़त बनाए रखने के लिए, सियोल अब सक्रिय रूप से विदेशी प्रतिभाओं को दीर्घकालिक निवास और नागरिकता की ओर ले जाने वाले कार्यक्रमों की पेशकश कर रहा है। नई नीति में आश्रितों (dependents) के लिए भी बेहतर प्रावधान शामिल हैं, जिससे परिवारों का दक्षिण कोरिया में बसना पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक हो गया है।
भारतीय आईटी पेशेवरों और शोधकर्ताओं के लिए, यह कदम सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत करता है। भारतीय दूतावास और कौशल विकास मंत्रालयों के माध्यम से आने वाले समय में इस संबंध में और अधिक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद है, ताकि इच्छुक उम्मीदवार इन नए प्रावधानों का लाभ उठा सकें।
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