राजनीति
सोनम वांगचुक की चेतावनी: अभिजीत दिपके या कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर करेंगे 42 दिनों की भूख हड़ताल
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 09:00 pm
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से पहले चेतावनी दी है कि यदि कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तो वह लंबी भूख हड़ताल करेंगे।
लद्दाख के प्रमुख पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक नई चेतावनी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने घोषणा की है कि यदि 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके या उनके साथ प्रदर्शन कर रहे किसी भी अन्य कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया जाता है, तो वह 42 दिनों की लंबी भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
यह घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले एक विरोध प्रदर्शन से पहले सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके शनिवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से वे सीधे जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए दिल्ली आ रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे।
सोनम वांगचुक पिछले कुछ महीनों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने और राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने पहले भी 'जलवायु उपवास' (Climate Fast) के माध्यम से सरकार का ध्यान लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और स्थानीय अधिकारों की ओर खींचने का प्रयास किया है। उनकी नई चेतावनी नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत के बाहर रहने वाले प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी लद्दाख का मुद्दा चर्चा का विषय रहा है। पर्यावरण संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति वांगचुक के समर्पण ने मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों को प्रभावित किया है, जो भारत के हिमालयी क्षेत्रों में सतत विकास और नागरिक अधिकारों के समर्थक हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी है। वांगचुक का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और यदि प्रशासन बल प्रयोग या गिरफ्तारी का रास्ता चुनता है, तो वे अपने अहिंसक प्रतिरोध को और तेज करेंगे। 42 दिनों की भूख हड़ताल की घोषणा ने इस पूरे मामले को एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जिस पर देश-दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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