राजनीति
मिसाइल शक्ति में भारत की बड़ी छलांग: छह रणनीतिक सफलताओं ने दुनिया के शीर्ष देशों की श्रेणी में किया शामिल
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 01:31 am

भारत ने हाल ही में इंटरसेप्टर, एंटी-शिप और हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकियों में बड़ी सफलता हासिल कर वैश्विक रक्षा मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की है।
भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक युगांतरकारी बदलाव लाते हुए छह प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इन सफलताओं ने भारत को दुनिया के उन गिने-चुने देशों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है जिनके पास अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक उपलब्ध है। हाल के महीनों में किए गए परीक्षणों की यह श्रृंखला न केवल भारत की स्वदेशी तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को भी एक नया आयाम देती है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किए गए इन परीक्षणों में सबसे प्रमुख 'मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल' (MIRV) तकनीक है। 'मिशन दिव्यास्त्र' के तहत अग्नि-5 मिसाइल के सफल परीक्षण ने भारत को उन विशिष्ट देशों के समूह में शामिल कर दिया है जो एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं। इसके अलावा, भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक बना लिया है। हाइपरसोनिक मिसाइलें अपनी अत्यधिक गति और दिशा बदलने की क्षमता के कारण आधुनिक रडार प्रणालियों को चकमा देने में माहिर होती हैं।
समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली एंटी-शिप मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है। यह विकास हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत की नौसैनिक शक्ति को सुदृढ़ करता है। साथ ही, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) के दूसरे चरण के सफल परीक्षण ने देश के हवाई क्षेत्र को सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर गर्व का विषय है, क्योंकि भारत अब वैश्विक रक्षा निर्यात और सुरक्षा सहयोग में एक बड़ी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों के परिप्रेक्ष्य में, भारत की यह सैन्य मजबूती क्वाड (QUAD) गठबंधन की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परीक्षणों ने भारत की 'न्यूनतम विश्वसनीय निवारण' (Minimum Credible Deterrence) की नीति को और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम कर स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दी जा रही है। इन सफलताओं के साथ, भारत अब वैश्विक स्तर पर एक उत्तरदायी और शक्तिशाली परमाणु शक्ति के रूप में अपनी धाक जमा चुका है।
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