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क्या बच्चों पर चिल्लाने के बाद उनसे माफी मांगनी चाहिए? मनोविज्ञान और आधुनिक परवरिश के बदलते पैमाने

ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 11:35 pm
क्या बच्चों पर चिल्लाने के बाद उनसे माफी मांगनी चाहिए? मनोविज्ञान और आधुनिक परवरिश के बदलते पैमाने

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों से गलती स्वीकारना कमजोरी नहीं बल्कि उनके भावनात्मक विकास के लिए एक सशक्त कदम है, जो पारिवारिक रिश्तों को मजबूती देता है।

अक्सर माता-पिता होने के नाते, संयम खो देना और बच्चों पर चिल्ला देना एक आम मानवीय प्रतिक्रिया है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जहां काम का दबाव और विस्तारित परिवार (Joint Family) के समर्थन की कमी अक्सर मानसिक तनाव का कारण बनती है, ऐसे क्षण और भी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या चिल्लाने के बाद बच्चों से माफी मांगना सही है? मनोवैज्ञानिकों का इस पर एक बहुत ही स्पष्ट और सकारात्मक उत्तर है। आधुनिक बाल मनोविज्ञान के अनुसार, जब एक माता-पिता अपनी गलती स्वीकार करते हैं और बच्चे से माफी मांगते हैं, तो यह बच्चे के मन में माता-पिता के प्रति सम्मान को कम नहीं करता, बल्कि भरोसे को और मजबूत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया बच्चे को 'जवाबदेही' (Accountability) का सबसे महत्वपूर्ण पाठ सिखाती है। जब वे देखते हैं कि उनके आदर्श—उनके माता-पिता—अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में विफल होने पर उसे स्वीकार कर रहे हैं, तो वे भी अपनी गलतियों को स्वीकार करना और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सीखते हैं। ऑस्ट्रेलियाई समाज में बच्चों की परवरिश के तरीके भारत के पारंपरिक तरीकों से काफी भिन्न हो सकते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों में अक्सर 'अनुशासन' को सर्वोपरि माना जाता है, जहां माता-पिता को एक आधिकारिक (Authoritarian) भूमिका में देखा जाता है। ऐसे में माफी मांगने को कुछ लोग अधिकार खोने के रूप में देख सकते हैं। लेकिन मनोवैज्ञानिकों का तर्क है कि 'रप्चर एंड रिपेयर' (Rupture and Repair) यानी रिश्ते में दरार और फिर उसका सुधार, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। यदि किसी गलती के बाद रिश्ता सुधारा नहीं जाता, तो बच्चे के मन में असुरक्षा और आत्म-संदेह की भावना पैदा हो सकती है। सच्ची माफी मांगने का भी एक तरीका होता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि माफी केवल 'सॉरी' कहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। माता-पिता को बच्चे को यह समझाना चाहिए कि वे क्यों चिल्लाए और साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि चिल्लाना सही व्यवहार नहीं था। उदाहरण के लिए, यह कहना कि "मुझे माफ कर दो, मैं आज ऑफिस के काम से बहुत थका हुआ था और मैंने तुम पर गुस्सा निकाल दिया, जो कि गलत था," बच्चे को सहानुभूति (Empathy) और आत्म-जागरूकता सिखाता है। अंततः, बच्चों से माफी मांगना उन्हें यह संदेश देता है कि कोई भी पूर्ण (Perfect) नहीं होता और गलतियां करना जीवन का एक हिस्सा है। यह न केवल उनके आत्म-सम्मान को बढ़ाता है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और पारदर्शी वातावरण भी प्रदान करता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जहां सांस्कृतिक संक्रमण की चुनौतियां बनी रहती हैं, यह अभ्यास एक स्वस्थ और सुखी अगली पीढ़ी को तैयार करने में नींव का पत्थर साबित हो सकता है।
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