ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग
शामली: कार दुर्घटना क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी पर ₹4.87 लाख का जुर्माना, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 07:39 am

शामली के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कार दुर्घटना मामले में क्लेम न देने पर यूनिवर्सल बीमा कंपनी को ₹4.87 लाख का भुगतान करने का आदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 'जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग' ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर ₹4.87 लाख का जुर्माना लगाया है। यह आदेश कंपनी द्वारा एक वैध कार दुर्घटना दावे (इंश्योरेंस क्लेम) को अनुचित तरीके से खारिज करने के मामले में आया है। आयोग ने इसे 'सेवा में भारी कमी' माना और कंपनी को ब्याज सहित मुआवजा देने का निर्देश दिया।
मामले के विवरण के अनुसार, शामली निवासी शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने अपनी कार का बीमा यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। बीमा अवधि के दौरान ही उनकी कार एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जिससे वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। दुर्घटना के तुरंत बाद, अरविंद कुमार ने नियमानुसार बीमा कंपनी को सूचित किया और मरम्मत के लिए क्लेम प्रस्तुत किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने तकनीकी कमियों और रिपोर्टिंग में देरी जैसे कारणों का हवाला देते हुए दावे को खारिज कर दिया।
बार-बार कंपनी के कार्यालय के चक्कर काटने और मानसिक रूप से परेशान होने के बाद, शिकायतकर्ता ने अंततः उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान, बीमा कंपनी के वकीलों ने तर्क दिया कि पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया गया था। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील ने सबूत पेश किए कि दुर्घटना के समय पॉलिसी वैध थी और सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा किए गए थे।
आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि बीमा कंपनी का रुख मनमाना और उपभोक्ता को परेशान करने वाला था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियां अक्सर दावों के भुगतान के समय छोटे-छोटे तकनीकी कारणों को बड़ा बनाकर उपभोक्ताओं को उनके हक से वंचित करती हैं, जो कानूनी रूप से गलत है।
फैसले के तहत, आयोग ने बीमा कंपनी को कार की मरम्मत की राशि के रूप में ₹3.47 लाख, उस पर दुर्घटना की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (जो लगभग ₹1.15 लाख है), मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹20,000 और कानूनी खर्च के रूप में ₹5,000 का भुगतान करने का आदेश दिया। यह पूरी राशि ₹4.87 लाख के आसपास बैठती है।
भारत में रहने वाले लोगों के साथ-साथ विदेशों में बसे भारतीय प्रवासियों (जैसे कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय) के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है। कई प्रवासी भारतीय भारत में अपनी संपत्तियों और वाहनों का बीमा कराते हैं। यह निर्णय यह भरोसा दिलाता है कि भारत की उपभोक्ता न्याय प्रणाली मजबूत है और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की मनमानी के खिलाफ छोटे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में सक्षम है। यदि सेवा प्रदाता अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं, तो उपभोक्ता अदालतें उनके खिलाफ कड़ा रुख अपना सकती हैं।
संबंधित ख़बरें
ब्रेकिंगब्रेकिंग
‘रोन गौड़’ जी.एस. पाटिल निर्विरोध चुने गए कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और रोन से चार बार के विधायक जी.एस. पाटिल को कर्नाटक विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया है।
15 अग॰ 2026, 07:37 am
ब्रेकिंगब्रेकिंग
प्रोफेशनल सर्विसेज में बड़े सुधारों की जरूरत, नीति आयोग ने उच्च-कुशल नौकरियों के लिए दिया व्यापक सुझाव
नीति आयोग ने पेशेवर सेवा क्षेत्र में पुराने कानूनों को बदलने और नियामक सुधारों की सिफारिश की है ताकि भारत उच्च-कुशल नौकरियों का केंद्र बन सके।
15 अग॰ 2026, 06:38 am
ब्रेकिंगब्रेकिंग
ऑनलाइन सट्टेबाजी 2026: डिजिटल रिवार्ड्स और निकासी नियमों में बड़े बदलाव, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए विशेष रिपोर्ट
साल 2026 में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स नए बोनस कोड और 24 घंटे के भीतर निकासी की सुविधा दे रहे हैं, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई गेमर्स के बीच इनका चलन बढ़ा है।
15 अग॰ 2026, 06:37 am

