राजनीति
जंतर-मंतर की जगह कहीं और हो प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 09:37 pm

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में प्रदर्शन के लिए किसी वैकल्पिक और बेहतर स्थान की मांग की गई है।
भारत की राजधानी दिल्ली के केंद्र में स्थित जंतर-मंतर, जो दशकों से लोकतांत्रिक विरोध और असंतोष की आवाज का मुख्य केंद्र रहा है, अब कानूनी जांच के दायरे में है। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है, जिसमें दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के बजाय किसी अन्य वैकल्पिक स्थान का चयन करने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को इस मामले में सरकार से निर्देश लेने और अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जंतर-मंतर अब बड़े विरोध प्रदर्शनों की मेजबानी के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है। याचिका में कहा गया है कि इस क्षेत्र में निरंतर होने वाले प्रदर्शनों के कारण स्थानीय निवासियों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है और क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधा आती है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रस्तावित मार्च और हाल के महीनों में हुए बड़े आंदोलनों का उल्लेख किया। वकील ने आगाह किया कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते हैं, तो 20 जुलाई जैसी अराजक स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है, जिससे पूरी दिल्ली की यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखना और प्रदर्शनों के लिए उचित प्रबंधन करना पूरी तरह से प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
ऐतिहासिक रूप से, जंतर-मंतर को 1993 में बोट क्लब से प्रदर्शन स्थल हटाए जाने के बाद मुख्य विरोध स्थल बनाया गया था। हालांकि, समय के साथ यहां भीड़ और बुनियादी ढांचे की कमी एक गंभीर मुद्दा बन गई है। याचिका में यह भी रेखांकित किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए उचित पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सहायता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जो स्वयं प्रदर्शनकारियों और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी मांगों या भारत में हो रही घटनाओं के समर्थन में जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलनों को करीब से देखते रहे हैं। जंतर-मंतर को भारतीय लोकतंत्र के 'स्पीकर्स कॉर्नर' के रूप में देखा जाता है। यदि इसका स्थान बदला जाता है, तो यह दिल्ली के राजनीतिक भूगोल और नागरिक सक्रियता के स्वरूप में एक बड़ा बदलाव होगा। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि भविष्य में दिल्ली की आवाज कहां से गूंजेगी।
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