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भाजपा की नियुक्तियों पर संजय राउत का कटाक्ष: 'किसे रखा और किसे हटाया, यह उनका आंतरिक मामला'

ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 09:38 pm
भाजपा की नियुक्तियों पर संजय राउत का कटाक्ष: 'किसे रखा और किसे हटाया, यह उनका आंतरिक मामला'

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भाजपा के नए संगठनात्मक बदलावों को उनका निजी मामला बताया है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा हाल ही में की गई संगठनात्मक नियुक्तियों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने स्पष्ट किया कि भाजपा के भीतर किसे पद दिया जा रहा है और किसे हटाया जा रहा है, यह पूरी तरह से उनका आंतरिक विषय है और विपक्ष को इससे कोई सरोकार नहीं है। राउत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। भाजपा ने हाल ही में कई नए चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जबकि कुछ पुराने नेताओं के पोर्टफोलियो में बदलाव किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने और असंतोष को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा चाहे जितने भी बदलाव कर ले, महाराष्ट्र की जनता का मूड बदल चुका है। उन्होंने कहा कि चेहरों को बदलने से पार्टी की नीतियों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का प्रभाव कम नहीं होता। राउत ने महाविकास अघाड़ी (MVA) की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन एकजुट है और भाजपा के किसी भी सांगठनिक बदलाव का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर महाराष्ट्र मूल के प्रवासियों के लिए भारत की यह राजनीतिक उथल-पुथल काफी मायने रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले मराठी भाषी भारतीय अक्सर सोशल मीडिया और सामुदायिक मंचों के माध्यम से अपने गृह राज्य की राजनीति पर नजर रखते हैं। महाराष्ट्र में होने वाले किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव का सीधा असर वहां के विकास कार्यों और प्रवासी निवेश पर पड़ता है, जिसे लेकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एनआरआई काफी सतर्क रहते हैं। राउत ने आगे कहा कि भाजपा अक्सर अपने नेताओं को बदलती रहती है ताकि विफलता की जिम्मेदारी किसी एक पर न आए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में हर पार्टी को अपने संगठन के विस्तार का अधिकार है। विपक्षी खेमे में इस हलचल को भाजपा की 'घबराहट' के रूप में देखा जा रहा है, जबकि भाजपा इसे एक सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया बता रही है। आने वाले महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट बैठेगी, यह इन संगठनात्मक बदलावों के जमीनी असर पर निर्भर करेगा।
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