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रूस-यूक्रेन युद्ध में भारी तबाही: जेलेंस्की के गृह क्षेत्र पर भीषण हमला, परमाणु संयंत्र पर मंडराया संकट
ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 08:37 pm

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और तेज हो गया है। रूस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति के गृह क्षेत्र को निशाना बनाया, जबकि यूक्रेन ने रूसी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर विनाशकारी मोड़ ले लिया है। बीते 24 घंटों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक को अंजाम दिया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, रूसी सेना ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के गृह क्षेत्र, क्रिवी रिह (Kryvyi Rih) सहित कई प्रमुख शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और कई लोगों के हताहत होने की खबर है।
दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनकी सेना ने एक ही दिन में यूक्रेन के 1,000 से अधिक ड्रोनों को मार गिराया है। यूक्रेन ने भी पलटवार करते हुए रूस के भीतर स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे, ड्रोन लॉन्च साइटों और एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है। यूक्रेन का कहना है कि ये हमले रूसी सेना की रसद आपूर्ति और हवाई हमले करने की क्षमता को कमजोर करने के लिए किए गए हैं।
युद्ध के मैदान में सबसे भीषण संघर्ष वर्तमान में पोक्रोव्स्क (Pokrovsk) के पास अग्रिम पंक्तियों पर देखा जा रहा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि रूस इस क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है, ताकि वह डोनबास क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल कर सके। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं रूस के नियंत्रण वाले जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Zaporizhzhia Nuclear Power Plant) को लेकर बढ़ गई हैं। संयंत्र के पास हुए हालिया ड्रोन हमलों ने एक बड़े परमाणु खतरे की आशंका को जन्म दे दिया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह संघर्ष वैश्विक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर चिंता का विषय बना हुआ है। भारत ने हमेशा शांति और कूटनीति के माध्यम से विवाद सुलझाने की वकालत की है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए, इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं सीधे तौर पर रहने की लागत (cost of living) को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा, कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों के तार पूर्वी यूरोप से जुड़े हुए हैं, जो मानवीय आधार पर इस संकट की समाप्ति की उम्मीद कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की यह नई लहर दर्शाती है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। ड्रोन तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है, जिससे नागरिक क्षेत्रों के लिए जोखिम और बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों ने एक बार फिर दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर आने की अपील की है, ताकि और अधिक रक्तपात को रोका जा सके।
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