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‘अराजकता के व्याकरण’ से रहें सावधान: आरएसएस नेता अतुल लिमये ने युवाओं से आंदोलनों के गहन अध्ययन का किया आह्वान

ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 11:37 pm
‘अराजकता के व्याकरण’ से रहें सावधान: आरएसएस नेता अतुल लिमये ने युवाओं से आंदोलनों के गहन अध्ययन का किया आह्वान

आरएसएस के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने युवाओं को आंदोलनों के पीछे की कार्यप्रणाली और वैचारिक पृष्ठभूमि को समझने की सलाह दी है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने युवाओं से किसी भी सामाजिक या राजनीतिक आंदोलन को केवल एक तात्कालिक घटना के रूप में न देखने का आग्रह किया है। एक हालिया संबोधन में, लिमये ने इस बात पर जोर दिया कि देश के युवाओं को ऐसे आंदोलनों के पीछे की पूरी प्रक्रिया, उनकी कार्यप्रणाली, उन्हें मिलने वाले समर्थन और उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि का गहराई से अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) जैसे आंदोलनों के संदर्भ में सतर्क रहने की बात कही। अपने संबोधन के दौरान, लिमये ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित 'अराजकता के व्याकरण' (Grammar of Anarchy) के विचार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर विरोध प्रदर्शनों का अपना महत्व है, लेकिन जब ये आंदोलन संवैधानिक सीमाओं को लांघकर समाज में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करते हैं, तो वे राष्ट्र के लिए हानिकारक हो जाते हैं। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि कौन सी ताकतें इन आंदोलनों को हवा दे रही हैं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या है। लिमये ने तर्क दिया कि अक्सर कुछ आंदोलनों को जन-विद्रोह के रूप में पेश किया जाता है, जबकि उनके पीछे एक सुव्यवस्थित ईकोसिस्टम काम कर रहा होता है। इसमें विदेशी फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय दबाव समूह और विशिष्ट विचारधाराएं शामिल हो सकती हैं जिनका उद्देश्य देश की छवि को धूमिल करना या आंतरिक कलह पैदा करना होता है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे किसी भी अभियान का हिस्सा बनने से पहले उसके 'सपोर्ट सिस्टम' की जांच करें। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीय अक्सर वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भारत में होने वाले घटनाक्रमों से जुड़े रहते हैं। लिमये का यह बयान इस संदर्भ में देखा जा सकता है कि प्रवासी युवा भी भारत के विरुद्ध चलाए जा रहे कथित नैरेटिव्स को बिना सोचे-समझे स्वीकार न करें। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय मूल के नागरिक भारत की 'सॉफ्ट पावर' के दूत हैं, और भारत की स्थिरता उनके हितों से सीधे जुड़ी हुई है। अंत में, आरएसएस नेता ने रचनात्मक नागरिकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विरोध का आधार तथ्य और राष्ट्रहित होना चाहिए, न कि केवल शोर-शराबा या अराजकता। युवाओं को जागरूक रहकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी ऐसी गतिविधि का हिस्सा न बनें जो अनजाने में ही सही, देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती हो।
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