ऑस्ट्रेलिया
बढ़ते दुर्व्यवहार के कारण ऑस्ट्रेलियाई यहूदी अपनी धार्मिक पहचान छिपाने को मजबूर: रॉयल कमीशन
ICN24 Newsroom 22 जुल॰ 2026, 05:35 am

ऑस्ट्रेलिया में यहूदी समुदाय के सदस्यों को बढ़ते दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई लोग सार्वजनिक स्थानों पर अपनी पहचान छिपाने को मजबूर हैं।
ऑस्ट्रेलिया में सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। एक रॉयल कमीशन के समक्ष दी गई गवाही में यह खुलासा हुआ है कि यहूदी समुदाय के सदस्य अपनी धार्मिक पहचान को सार्वजनिक रूप से प्रकट करने से डर रहे हैं। कमीशन को बताया गया कि यहूदी धर्मस्थलों (सिनगॉग) तक जाते समय समुदाय के लोगों को बढ़ते दुर्व्यवहार और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण कई लोग अब अपनी पहचान छिपाने के लिए मजबूर हैं।
गवाही के दौरान यह बताया गया कि जो लोग पारंपरिक धार्मिक वस्त्र या प्रतीक, जैसे कि 'किप्पाह' (Kippah) पहनते हैं, उन्हें सड़कों पर अकारण ही निशाना बनाया जा रहा है। इस डर के कारण कई पुरुष अब किप्पाह के ऊपर टोपी (बेसबॉल कैप) पहनने लगे हैं, ताकि वे किसी की नज़र में न आएं। यह स्थिति केवल सिडनी या मेलबर्न जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से इस तरह की रिपोर्ट सामने आ रही हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है। एक बहुसांस्कृतिक समाज के रूप में ऑस्ट्रेलिया की पहचान उसकी धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी सम्मान पर टिकी है। जब किसी एक अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी आस्था के प्रतीकों को छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो यह पूरे समाज के लोकतांत्रिक मूल्यों और सुरक्षा ढांचे पर सवाल खड़े करता है। भारतीय समुदाय, जो स्वयं अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान (जैसे पगड़ी, तिलक या हिजाब) के साथ सार्वजनिक जीवन जीता है, इस तरह के असुरक्षा बोध से अनभिज्ञ नहीं है। हाल के वर्षों में विभिन्न समुदायों के खिलाफ बढ़ते हेट-स्पीच और भेदभाव के मामलों ने ऑस्ट्रेलिया के 'सोशल कोहेजन' (सामाजिक एकजुटता) को चुनौती दी है।
कमीशन को दी गई जानकारी में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह दुर्व्यवहार केवल मौखिक टिप्पणियों तक सीमित नहीं है। कई मामलों में शारीरिक धमकियां और डराने-धमकाने वाले व्यवहार भी देखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों और बढ़ते ध्रुवीकरण का असर ऑस्ट्रेलिया की सड़कों पर महसूस किया जा रहा है। समुदाय के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई जाए और घृणा अपराधों (Hate Crimes) के खिलाफ सख्त कानून लागू किए जाएं।
यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि अपनी पहचान छिपाना किसी भी नागरिक के लिए एक मानसिक बोझ की तरह है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि यह उन मूल्यों के भी विपरीत है जिनके लिए ऑस्ट्रेलिया जाना जाता है। इस गवाही के बाद, मानवाधिकार समूहों और अन्य प्रवासी समुदायों ने भी एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म के कारण भय के साये में नहीं रहना चाहिए। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से अपील की गई है कि वे पूजा स्थलों के आसपास गश्त बढ़ाएं और ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करें जो सामाजिक शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
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