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RBI फ्लोटिंग बॉन्ड की 8.05% ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं: क्या अभी भी निवेश करना है फायदेमंद?

ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 02:31 pm
RBI फ्लोटिंग बॉन्ड की 8.05% ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं: क्या अभी भी निवेश करना है फायदेमंद?

आरबीआई ने फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड पर 8.05% ब्याज दर बरकरार रखी है। एनएससी दरों में बदलाव न होने के कारण यह बॉन्ड अभी भी निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना हुआ है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड (FRSB) 2020 की ब्याज दर को 8.05 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह निर्णय भारत सरकार द्वारा नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) की ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के फैसले के बाद आया है। वर्तमान में, वित्त मंत्रालय ने चालू तिमाही के लिए एनएससी (NSC) की दर को 7.7 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। चूंकि आरबीआई के इन फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स की ब्याज दर सीधे तौर पर एनएससी से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें कोई बदलाव नहीं देखा गया है। नियम के अनुसार, आरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज एनएससी की तत्कालीन दर से 0.35 प्रतिशत अधिक होता है। इस फॉर्मूले के आधार पर, 7.7 प्रतिशत की एनएससी दर में 0.35 प्रतिशत का प्रीमियम जोड़ने पर प्रभावी ब्याज दर 8.05 प्रतिशत हो जाती है। यह दर उन निवेशकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है जो शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न की तलाश में हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए, जो अक्सर भारत में अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित निवेश माध्यमों में लगाना चाहते हैं, यह एक विश्वसनीय विकल्प है। आरबीआई के ये बॉन्ड कई मायनों में पारंपरिक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बेहतर साबित हो रहे हैं। वर्तमान में, अधिकांश प्रमुख भारतीय बैंक 1 से 3 साल की एफडी पर 7 से 7.5 प्रतिशत के आसपास ब्याज दे रहे हैं। इसकी तुलना में 8.05 प्रतिशत का रिटर्न और भारत सरकार की 'सॉवरेन गारंटी' इसे कहीं अधिक सुरक्षित और लाभदायक बनाती है। विशेष रूप से उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो नियमित आय पर निर्भर हैं, यह बॉन्ड हर छह महीने में ब्याज का भुगतान सुनिश्चित करता है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये बॉन्ड 'फ्लोटिंग' प्रकृति के हैं। इसका अर्थ है कि यदि भविष्य में सरकार एनएससी की दरों में कटौती करती है, तो इस बॉन्ड की ब्याज दर भी गिर सकती है। इसके विपरीत, यदि एनएससी की दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के स्वतः ही बढ़ा हुआ लाभ मिलने लगेगा। इस बॉन्ड की परिपक्वता अवधि 7 वर्ष है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए उनकी आयु के आधार पर समय से पहले निकासी के विशेष प्रावधान उपलब्ध हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग जो भारत में अपने माता-पिता के नाम पर या स्वयं के एनआरओ (NRO) खातों के माध्यम से निवेश करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय सही हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन बॉन्ड्स से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य (Taxable) होता है और यह निवेशक के आयकर स्लैब के अनुसार लागू होता है। कुल मिलाकर, वर्तमान वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच, आरबीआई का यह 8.05% का रिटर्न एक मजबूत और स्थिर निवेश पोर्टफोलियो बनाने में मददगार सिद्ध हो सकता है।
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